Delhi News: राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित चीनी दूतावास के बाहर चीन जनवादी गणराज्य के 77वें स्थापना दिवस पर तिब्बती युवा कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। तिब्बत पर बीजिंग के लगातार कब्जे और राजनीतिक नियंत्रण की कड़ी निंदा की गई। इसमें उन्हें मुख्य मांगे और सांस्कृतिक मुद्दों को उठाया। दिल्ली पुलिस ने चीन के राष्ट्रीय दिवस का विरोध कर रहे तिब्बती युवा कांग्रेस के 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है।
तिब्बत नहीं था कभी चीन का हिस्सा
दरअसल विरोध प्रदर्शन के दौरान युवा संगठन ने तिब्बत ही नहीं बल्कि पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया पर भी चीन के संप्रभुता के दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। बीजिंग के शासन को साम्राज्यवादी और औपनिवेशिक उद्यम के रूप में चित्रित किया गया है। विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं का मानना है कि तिब्बत कभी चीन का हिस्सा नहीं था और न कभी होगा। जबरन आक्रमण, पूर्व स्वतंत्र तिब्बत राज्य, पूर्वी तुर्किस्तान, दक्षिणी मंगोलिया और मंचूरिया जैसे अन्य राष्ट्रों को चीन में मिलाने की कोशिश की जा रही है। जिससे सामान्य तौर पर उसकी स्वतंत्रता पर नया हमला है।
तिब्बती युवा कांग्रेस ने बयान में क्या कुछ कहा?
अन्य पड़ोसी राज्यों पर क्षेत्रीय आक्रमण और सीमा अतिक्रमण की इसकी औपनिवेशिक प्रथा चीनी राज्य के अस्तित्व के साम्राज्यवादी इरादे को दर्शाती है। तिब्बती युवा कांग्रेस की तरफ से दिए गए एक बयान में कहा, कोई भी उपाय और उसके औपनिवेशिक कानून और नीतियां तिब्बत की मुख्य राष्ट्रीय ऐतिहासिक दावों, पहचान और अपने राजनीतिक भविष्य को स्वयं निर्धारित करने की इच्छा को मिटाने में सफल नहीं होंगी।
इसके साथ ही तिब्बती युवा कांग्रेस ने अपने बयान में यह भी कहा है कि, तिब्बती नेताओं ने चीन की 77वीं स्थापना वर्षगांठ पर चीनी नेतृत्व से तिब्बतियों और अन्य गैर-हान राष्ट्रीयताओं की आकांक्षाओं, सांस्कृतिक पहचान और जीवन शैली का सम्मान करने का आह्वान किया।
अध्यक्ष डोल्मा त्सेरिंग तेयखांग का बयान
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन की संसद (Tibetan Parliament-in-Exile - TPiE) की अध्यक्ष डोल्मा त्सेरिंग तेयखांग ने मामले में कहा कि चीन द्वारा एकता, सद्भाव और विकास पर जोर देने के साथ-साथ गैर-हान समुदायों की विविधता, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान भी होना चाहिए। विविधता के बिना एकता सांस्कृतिक तत्वों को शामिल करते हैं और स्वतंत्रता व अपनी बात कहने के अधिकार के बगैर स्वतंत्रता नहीं है। स्वतंत्रता के बिना सामंजस्य स्थापित नहीं है।
तेयखांग ने यह भी कहा कि तिब्बती लोग चीन के साथ शत्रुता या टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी पहचान, धर्म, संस्कृति और जीवन शैली को बचाना चाहते हैं। उनका कहना है हमारी जीवनशैली, धर्म, संस्कृति, करुणा, अहिंसा और सहअस्तित्व की परंपरा में गहराई है। उन्होंने चीनी नेतृत्व से तिब्बती बौद्ध धर्म का सम्मान करने और तिब्बती बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने की अनुमति देने का आग्रह किया।
हाल ही में पारित जातीय एकता और प्रगति कानून का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, तिब्बती लोग गैर-हान राष्ट्रीयताओं की पहचान को मिटाने वाली स्थिति का विरोध कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बतियों, उइगरों और मंगोलों का समर्थन करने और संयुक्त राष्ट्र में उनकी चिंताओं को उजागर करने के लिए भी तेयखांग ने आग्रह किया।
जातीय-संबंधी कानून का भी किया जिक्र
तिब्बती केंद्रीय प्रशासन के प्रवक्ता तेनज़िन लेकशाय ने कहा, चीन के राष्ट्रीय दिवस पर भव्य समारोह आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है। चीनी नेताओं को तिब्बतियों समेत विभिन्न राष्ट्रीयताओं की आकांक्षाओं को पहचानना चाहिए। उनका कहना है कि उन पर अत्याचार हो रहा है। इस राष्ट्रीय दिवस पर विभिन्न राष्ट्रीयताओं के लोगों की बहुत सारी आकांक्षाएं हैं। जिन पर चीनी सरकार द्वारा अत्याचार किया जा रहा है।
उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया जाना चाहिए। चीन के नए जातीय-संबंधी कानून का भी जिक्र करते हुए कहा कि इससे तिब्बत की पहचान खत्म हो सकती है। तिब्बती और अन्य प्रभावित समुदाय अपनी शिकायतें उठाते रहेंगे। उन्होंने नए कानून के कार्यान्वयन के संबंध में चीनी नेतृत्व पर दबाव बनाने का आह्वान किया। असर में यह टिप्पणियां उस समय आई जब 1 अक्टूबर 1949 को स्थापित पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की 77वीं वर्षगांठ मनाई जा रही थी।
यह भी पढ़ें: देश मना रहा है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती, जानिए उनके अहम योगदान?