Thalapathy Vijay News: तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री थलपति विजय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले वाम दलों ने TVK से दूरी बनाते हुए अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। CPI और CPM ने साफ किया है कि वे आगामी उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

हालांकि, फिलहाल दोनों पार्टियों ने विजय सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान नहीं किया है। लेकिन सहयोगी दलों के इस रुख ने TVK सरकार की राजनीतिक स्थिति को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

CPI-CPM ने अलग चुनाव लड़ने का किया ऐलान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगामी उपचुनाव में CPI धारापुरम सीट से और CPM मदुरंतकम सीट से अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। दोनों दलों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे TVK के नेतृत्व वाले किसी चुनावी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।CPM नेता पी. षणमुगम के एक इंटरव्यू में दिए बयान ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, विजय सरकार को पूरे पांच साल तक समर्थन मिलेगा या नहीं, यह सरकार की नीतियों, फैसलों और लोगों के प्रति उसके रवैये पर निर्भर करेगा।यानी फिलहाल समर्थन जारी है, लेकिन भविष्य के लिए वाम दलों ने अपने विकल्प खुले रखे हैं।

विजय की गठबंधन बैठक से भी वाम दलों ने बनाई दूरी

वाम दलों और TVK के बीच बढ़ती दूरी का संकेत इससे पहले भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री विजय ने 9 सितंबर को गठबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बैठक बुलाई थी, लेकिन वाम दल इसमें शामिल नहीं हुए।CPM की ओर से कहा गया कि TVK एक नए गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ रही थी, इसलिए पार्टी ने बैठक से दूरी बनाई। वहीं CPI का रुख भी फिलहाल यही है कि वह सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है, लेकिन किसी चुनावी गठबंधन में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है।

आखिर विजय से क्यों नाराज हैं वाम दल?

वाम दलों की नाराजगी के पीछे कई राजनीतिक और नीतिगत कारण बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय को भविष्य में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की चर्चाओं से भी सहयोगी दल सहज नहीं हैं।इसके अलावा विश्वविद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों और छात्र प्रदर्शनों को लेकर सरकार के कथित फैसलों पर भी वाम दलों ने आपत्ति जताई है। छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर जारी एक सर्कुलर पर विवाद हुआ था, जिसके बाद उसे वापस ले लिया गया।वहीं गुजिलीअम्पराई में एक तहसीलदार द्वारा कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाए जाने की खबर ने भी वाम दलों की नाराजगी बढ़ाई है।

विधानसभा में विजय के अंदाज पर भी सवाल

वाम दलों की नाराजगी केवल सरकार की नीतियों तक सीमित नहीं बताई जा रही है। विजय के विधानसभा में राजनीतिक तौर-तरीकों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।वाम दलों की ओर से आरोप लगाया गया है कि विधानसभा में लगातार होने वाली तीखी और नाटकीय बहस के कारण जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर सरकार या TVK की ओर से क्या जवाब दिया गया है, यह भी देखना अहम होगा।

क्या सच में गिर सकती है विजय सरकार?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी कि वाम दलों की अलग राह से विजय सरकार गिरने की स्थिति में आ गई है। CPI और CPM ने अभी सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा नहीं की है।लेकिन उपचुनाव में अलग-अलग उम्मीदवार उतारना और सरकार की नीतियों पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाना गठबंधन की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।अब 6 अक्टूबर को धारापुरम और मदुरंतकम सीटों पर होने वाले उपचुनाव के नतीजों पर राजनीतिक नजरें रहेंगी। इन नतीजों से यह संकेत मिल सकता है कि TVK का जनाधार कितना मजबूत है और सहयोगी दलों के बीच आगे की राजनीति किस दिशा में जाती है।फिलहाल विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती सरकार बचाने से ज्यादा अपने सहयोगी दलों को साथ बनाए रखने और गठबंधन की एकजुटता कायम रखने की दिखाई दे रही है।