नई दिल्ली: 2023 की मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहत शिविरों में हुई अप्राकृतिक मौतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने मणिपुर के मुख्य सचिव से राहत शिविरों में सामने आईं 25 अप्राकृतिक मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इनमें कथित यौन हिंसा से जुड़ी एक मौत का मामला भी शामिल है।

25 मौतों पर मांगी पूरी जानकारी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य सरकार को सभी 25 मामलों की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत ऐसे सभी दस्तावेज मांगे हैं, जिनसे मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी स्पष्टीकरण मांगा कि राहत शिविरों में हुई मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम केवल सीमित मामलों में ही क्यों कराया गया। अदालत के समक्ष रखी गई रिपोर्ट में राहत शिविरों में आठ जिलों में 640 मौतों का उल्लेख किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया था। पीठ ने यह भी पूछा कि अप्राकृतिक मौतों के मामलों में प्रभावित परिवारों को केवल 20 हजार से 30 हजार रुपये तक का मुआवजा क्यों दिया गया।

गीता मित्तल समिति की रिपोर्ट का भी लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया। समिति ने राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की स्थिति, मौतों और मुआवजे से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया था। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने राज्य के महाधिवक्ता से समिति की ओर से 4 जुलाई को मांगी गई जानकारी पर भी सवाल किए और राज्य से उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा।

राहत शिविरों में सुरक्षा और सुविधाओं पर भी निर्देश
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह बताने को कहा कि राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (IDPs) की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने शिविरों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और रोजमर्रा की जरूरी चीजें उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

हर अप्राकृतिक मौत में FIR और तेज जांच का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (MSLSA) को मामले पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। प्राधिकरण को सभी अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराने, मौत के कारणों का उचित पता लगाने और पहले से दर्ज मामलों की जांच में तेजी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?
यह सुनवाई 2023 की मणिपुर जातीय हिंसा के दौरान सामने आए यौन हिंसा के मामलों की जांच और ट्रायल से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही है। अदालत ने सुनवाई के दौरान राहत शिविरों में हुई मौतों और वहां रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी गंभीरता से लिया है।