नई दिल्ली : विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से घोषित ‘संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’ का कड़ा विरोध किया है।
VHP के केंद्रीय संयुक्त सचिव विजय शंकर तिवारी ने मंगलवार को कहा कि भारत संविधान से संचालित देश है और देश में संविधान सर्वोच्च है, शरिया नहीं।
तिवारी ने कहा, “जो संगठन संविधान के समानांतर शरिया लागू करने की बात करते हैं, वे देश की एकता को कमजोर कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत में मुस्लिम नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन नागरिकता के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी आती हैं। देश के कानूनों को स्वीकार करना, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना और समान नागरिक संहिता (UCC) की भावना को समझना भी नागरिक जिम्मेदारियों का हिस्सा है।
मुसलमानों के उत्पीड़न की तस्वीर अधूरी और भ्रामक
VHP नेता ने आरोप लगाया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बार-बार ऐसी तस्वीर पेश करता है, जिससे यह धारणा बनती है कि मुसलमानों को प्रताड़ित किया जा रहा है, मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है तथा बुलडोजर की कार्रवाई विशेष रूप से उनके खिलाफ हो रही है।
उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अदालत के आदेशों का उल्लंघन किसी धर्म की रक्षा के दायरे में नहीं आता। कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है और अवैध गतिविधियों को वैध बताकर पीड़ित होने का दावा करना उचित नहीं है।
UCC का विरोध महिलाओं के समान अधिकारों का विरोध: VHP
तिवारी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विरोध करके मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने ही समुदाय की महिलाओं के समान अधिकारों का विरोध कर रहा है।
उन्होंने बहुविवाह, असमान विरासत अधिकार और संविधान में निहित समानता के सिद्धांत से टकराने वाले व्यक्तिगत कानूनों को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की मांग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के संबंध में अदालतों और संसद द्वारा उठाए गए कदम न्याय के हित में थे।
‘वंदे मातरम्’ का सम्मान देशभक्ति का प्रतीक
VHP नेता ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा गीत है और राष्ट्र के प्रति सम्मान व्यक्त करना किसी धर्म का अपमान नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं कर सकते, वे संविधान की बात करने का नैतिक अधिकार खो देते हैं।
संविधान और शरिया में टकराव हो तो किसे मानेंगे?
तिवारी ने मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध वर्ग से अपील की कि वे अपने नेताओं के बयानों के कारण समाज में भय का माहौल पैदा न होने दें।
उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों के जीवन, संपत्ति और पूजा स्थलों की सुरक्षा संविधान करता है, शरिया नहीं। उन्होंने कट्टरपंथी नेताओं से सवाल किया कि यदि संविधान और शरिया के बीच कभी टकराव की स्थिति पैदा होती है, तो वे किसे मानेंगे—संविधान या शरिया?
किसी समुदाय का कानून संविधान से ऊपर नहीं
उन्होंने कहा कि VHP का स्पष्ट मत है कि भारत में किसी भी समुदाय का व्यक्तिगत कानून संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता राष्ट्रीय एकता और वास्तविक समानता की मांग है।
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई धार्मिक आधार पर नहीं रोका जा सकता
तिवारी ने कहा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को धार्मिक आधार पर नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान देशभक्ति की अभिव्यक्ति है, किसी धर्म का विरोध नहीं।
उन्होंने अंत में कहा कि हिंदू समाज किसी की वैध धार्मिक प्रथाओं का विरोध नहीं करता, लेकिन संविधान से ऊपर शरिया लागू करने की कोई भी कोशिश राष्ट्रहित के खिलाफ है।
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