नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को राजस्थान के जैसलमेर में भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण को लेकर परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में भारतीय सेना की क्षमताओं को और मजबूत बनाने, आधुनिक रक्षा तकनीकों को अपनाने तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप रक्षा बलों को तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारतीय रक्षा बलों को आधुनिक और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में विचार-विमर्श करना रहा। 

उभरती सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के तरीकों, तकनीकी तरक्की जरूरी

इस बैठक में उभरती सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध के तरीकों, तकनीकी तरक्की एवं भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी मज़बूत और कार्यात्मक रूप से फुर्तीली मिलिट्री बनाने की ज़रूरत पर पूरी चर्चा हुई। इस बैठक में अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म, वेपन सिस्टम और टेक्नोलॉजी को शामिल करने में तेज़ी लाने के लिए विकसित क्षमता और फोर्स का आधुनिकरण शामिल था। ताकि लड़ाई में असर और ऑपरेशनल तैयारी को बढ़ाया जा सके।

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के ज़रिए स्वदेशी रिसर्च पर जोर दिया

इसके तहत तीनों सेनाओं के इंटीग्रेशन, जॉइंट ऑपरेशनल प्लानिंग और कई डोमेन में कैपेबिलिटीज़ के सिनर्जाइज्ड एप्लीकेशन को मज़बूत करके संयुक्त और इंटीग्रेशन पर भी ज़ोर दिया गया। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के ज़रिए स्वदेशी रिसर्च, डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग के ज़रिए स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को और बढ़ावा दिया जाएगा। जिसमें घरेलू इंडस्ट्री, स्टार्ट-अप और एकेडेमिया की ज़्यादा भागीदारी होगी।

AI स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एडवांस्ड कम्युनिकेशन अहम

इस बैठक में उभरती और विघटनकारी प्रौद्योगिकी पर ज़ोर दिया गया। जिसमें भविष्य की लड़ाइयों के लिए तैयार रहने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म, साइबर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एडवांस्ड कम्युनिकेशन का इस्तेमाल करने पर जोर किया गया। इसके अलावा, डिफेंस रिसर्च और इनोवेशन, डिफेंस फोर्स, DRDO, डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, प्राइवेट इंडस्ट्री और एकेडमिक इंस्टीट्यूशन के बीच सहयोग को मज़बूत करने पर फोकस करेंगे ताकि इनोवेशन से ऑपरेशनल कैपेबिलिटी में बदलाव को तेज़ किया जा सके।