नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को घोषणा की है कि बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने व्यापक गाद प्रबंधन नीति लागू की है। इस नीति का उद्देश्य बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटना ,नदियों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों में जमा गाद को वैज्ञानिक तरीके से हटाना और उसका उपयोग विकास कार्यों में करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या और नदियों में गाद जमा होने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। 

बुनियादी परियोजनाओं में किया जाएगा मिट्टी और रेत का इस्तेमाल

नई नीति के तहत नदियों से निकाली गई मिट्टी और रेत का इस्तेमाल नेशनल हाईवे, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में किया जाएगा। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित किसानों को खेतों से जमा बालू हटाने के लिए प्रति दो हेक्टेयर 20 हजार रुपये की सहायता देने का भी प्रावधान है। इस पहल से बाढ़ के खतरे को कम करने, जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।

सिल्ट जमा होने पर विकास के लिए स्त्रोत बदलने में मिलेगी मदद

इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘नदी संजीवनी’ पहल के तहत नदी से सिल्ट निकालने और नेशनल हाईवे बनाने में सिल्ट का इस्तेमाल विकास कार्य के लिए किया जाएगा। चौधरी ने कहा कि इस पहल से बिहार को अपनी कमजोरियों, खासकर बाढ़ और सिल्ट जमा होने पर विकास के लिए स्त्रोत बदलने में मदद मिलेगी। राज्य में बाढ़ की स्थिति के बारे में बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि सात बड़ी नदियां नेपाल से बिहार में आती हैं, जिससे राज्य बारिश और पड़ोसी इलाकों में पानी के डिस्चार्ज के प्रति कमजोर हो जाता है।

बिहार के लोग अपने पानी से नहीं बल्कि दूसरे के पानी से होते हैं तबाह

बिहार के CM सम्राट चौधरी ने कहा कि, “बिहार में दो मुख्य कमज़ोरियाँ हैं। लेकिन, बिहार के लोग अपने पानी से तबाह नहीं होते बल्कि वे कहीं और से आने वाले पानी से तबाह होते हैं। सात बड़ी नदियाँ नेपाल से बिहार में आती हैं। बिहार में बारिश हो या न हो, अगर नेपाल में बारिश होती है, तो बिहार में तबाही होती है। उन्होंने इस साल की बारिश और नदियों के लेवल का ज़िक्र करते हुए कहा कि बिहार में 32 प्रतिशत से कम बारिश रिकॉर्ड की गई, लेकिन तीन बड़ी नदियाँ फिर भी बाढ़ के पीक लेवल पर पहुँच गईं।