अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के खुद को 'दिमागी नक्सली' कहने वाले बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इस मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता पर तीखा तंज कसा। वहीं, CPM नेता हन्नान मोल्लाह ने रिजिजू के बयान का विरोध करते हुए उन पर ही निशाना साध दिया। इस तरह एक अभिनेता के बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है।
किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह पहले अभिनेता को पसंद करते थे और उनका सम्मान भी करते थे। रिजिजू के मुताबिक, वह शाह को एक सामान्य कलाकार के रूप में देखते थे और उन्हें एक अच्छा इंसान समझते थे।
हालांकि, अभिनेता की हालिया टिप्पणी सामने आने के बाद उनकी राय बदल गई। मंत्री ने कहा कि उन्हें पहले अंदाजा नहीं था कि नसीरुद्दीन शाह की विचारधारा इस तरह की हो सकती है, उन्होंने अभिनेता की सोच को 'दिमागी नक्सली' जैसी बताते हुए आलोचना की।
रिजिजू ने यही बात सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के जरिए भी रखी, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
CPM नेता हन्नान मोल्लाह ने दिया करारा जवाब
किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर CPM नेता हन्नान मोल्लाह ने कड़ी आपत्ति जताई। समाचार एजेंसी बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री को देश के स्वतंत्रता आंदोलन, लोकतांत्रिक व्यवस्था, संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की समझ होनी चाहिए।
मोल्लाह ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक प्रतिष्ठित अभिनेता हैं, जिन्हें भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। अगर उन्होंने Gen Z के प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, तो उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। किसी की राय से असहमति होने पर उस पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना उचित नहीं है।
CPM नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में सरकार से सवाल करने और उसकी नीतियों की आलोचना करने वाले लोगों को अलग-अलग नाम देकर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आलोचकों को 'ब्रेनवॉश्ड नक्सल' या 'एंटी-नेशनल' बताना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मोल्लाह ने पलटवार करते हुए रिजिजू के लिए 'मेंटल क्रिमिनल' शब्द का इस्तेमाल किया। उनके इस बयान ने विवाद को और ज्यादा तूल दे दिया।
आखिर नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था?
दरअसल, विवाद की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के एक वीडियो से हुई। इस वीडियो में अभिनेता सरकार और उसके समर्थकों की ओर से आलोचकों को दिए जाने वाले 'एंटी-नेशनल', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और 'दिमागी नक्सली' जैसे विशेषणों पर अपनी प्रतिक्रिया देते नजर आए।
शाह ने इन आरोपों से पीछे हटने के बजाय खुद को गर्व के साथ 'दिमागी नक्सली' बताया, उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि उन्हें एंटी-नेशनल या टुकड़े-टुकड़े गैंग कहा जाता है तो कहा जाए, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता।
अभिनेता का यह बयान सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर केंद्रित था। उनका संदेश था कि असहमति रखने वालों को ऐसे तमगों से डराया नहीं जा सकता।
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बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक विवाद
नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया और फिर हन्नान मोल्लाह के पलटवार ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे दिया है। एक तरफ रिजिजू ने अभिनेता की विचारधारा पर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ CPM नेता ने इसे लोकतांत्रिक असहमति पर हमला करार दिया।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की आजादी, सरकार की आलोचना और राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।