महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का कार्यक्रम संशोधित कर दिया है। नए आदेश के मुताबिक, अब महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। आयोग ने महाराष्ट्र समेत पांच अन्य राज्यों के लिए भी संशोधित कार्यक्रम जारी किया है।
नई समयसीमा के अनुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, हटाने या किसी प्रकार का सुधार कराने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 13 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, प्राप्त दावों और आपत्तियों के साथ नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया का निपटारा 25 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। इसके बाद 30 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
संशोधित कार्यक्रम का व्यापक प्रचार करने के निर्देश
चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया है कि नई समयसीमा की जानकारी जल्द से जल्द आम मतदाताओं तक पहुंचाई जाए। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता और प्रचार अभियान तेज करने को कहा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदाता सूची में अपने नाम की जांच कर सकें और जरूरत पड़ने पर दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकें।
आयोग ने संशोधित कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार से संबंधित जानकारी उसे उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। नई समयसीमा सामने आने के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख में आगे बदलाव नहीं किया जाएगा।
SIR के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध जारी
महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
इंडिया गठबंधन के नेता भी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने इसे वोट चोरी से जोड़ते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी क्रम में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की एक बड़ी रैली प्रस्तावित है। विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाना शामिल है।
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चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक बता रहा है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों और कमियों को दूर करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। वोट चोरी और चुनावी धांधली से जुड़े विपक्ष के आरोपों को भी आयोग पहले ही खारिज कर चुका है।
फिलहाल, एक तरफ चुनाव आयोग संशोधित समयसीमा के तहत SIR की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखे हुए है। ऐसे में महाराष्ट्र में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।