Myanmar Training Camp Case: म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दे दी है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने उसे मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था। वह करीब 180 दिनों से हिरासत में था।

स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा की अदालत ने शुक्रवार को वैनडाइक को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उन्हें दिल्ली में ही रहने और जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है।

UAPA की धाराएं चार्जशीट में नहीं, इसी आधार पर मिली डिफॉल्ट बेल

इस मामले में NIA ने 8 सितंबर को वैनडाइक समेत सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। खास बात यह है कि चार्जशीट में UAPA की धाराएं शामिल नहीं की गईं। एजेंसी ने सातों के खिलाफ Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।NIA ने अदालत को बताया था कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है और यदि जांच में अपराध बनता है तो आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।वैनडाइक की ओर से इसी आधार पर डिफॉल्ट बेल की मांग की गई थी। उनकी दलील थी कि तय कानूनी अवधि के भीतर जांच पूरी करके संबंधित आरोपों की चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।

कोर्ट ने 6 यूक्रेनी नागरिकों को लेकर भी कही अहम बात

इस मामले में वैनडाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिक भी गिरफ्तार किए गए थे। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर वे भी जमानत के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें भी डिफॉल्ट बेल का कानूनी अधिकार हो सकता है।वैनडाइक को फिलहाल विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने विदेश यात्रा की अनुमति के लिए अलग से आवेदन किया है, जिस पर अदालत मंगलवार को सुनवाई करेगी।

क्या है म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामला?

NIA ने मार्च 2026 में वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप था कि ये लोग म्यांमार गए थे और वहां जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार तथा ड्रोन संचालन से जुड़ी ट्रेनिंग देने में शामिल थे।NIA ने यह भी आरोप लगाया था कि इन लोगों के संबंध भारत और म्यांमार से जुड़े जातीय सशस्त्र समूहों से थे और वे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गतिविधियों में सहायता कर रहे थे। हालांकि, 8 सितंबर को दाखिल चार्जशीट में एजेंसी ने UAPA के तहत आरोप नहीं लगाए और Immigration and Foreigners Act के तहत ही आरोप दाखिल किए।

भारत में कैसे पहुंचे थे आरोपी?

NIA के मुताबिक, आरोपी विदेशी नागरिक भारत आए और इसके बाद मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने वहां जातीय सशस्त्र समूहों से संपर्क किया और ट्रेनिंग गतिविधियों में हिस्सा लिया।NIA ने यह भी आरोप लगाया था कि यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की खेप लाई गई थी। इन आरोपों और UAPA से जुड़े पहलुओं पर जांच अभी जारी बताई गई है।

अभी खत्म नहीं हुई NIA की जांच

मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल मिलने का मतलब यह नहीं है कि मामले की जांच खत्म हो गई है या अदालत ने आरोपों पर अंतिम फैसला दे दिया है। NIA ने अदालत को बताया है कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।वहीं, वैनडाइक को जमानत देते समय अदालत ने उन्हें दिल्ली में रहने और जांच के दौरान NIA के सामने उपलब्ध रहने की शर्त लगाई है।