West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के बंटवारे के बाद चुनावी तस्वीर बदल गई है। बता दें कि चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Flowers & Grass’ (घास और दो फूल) वाले मूल चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। इसके बाद 18 सितंबर को आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम और ‘Football Player’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम और ‘Envelope’ (लिफाफा) चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में दर्ज किया गया है।

28 साल से TMC की पहचान था ‘जोड़ाफूल’
इस पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस चुनाव चिह्न की है, जिसे आम तौर पर ‘जोड़ाफूल’ कहा जाता है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह ‘Flowers और Grass’ के नाम से दर्ज रहा है और लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस की चुनावी पहचान का हिस्सा रहा। ‘जोड़ाफूल’ सिर्फ एक चुनावी निशान नहीं रहा, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक पहचान से जुड़ा रहा है। पार्टी के नाम में शामिल ‘तृणमूल’ शब्द का संबंध जमीनी स्तर और घास की जड़ से जोड़ा जाता है। इसी वजह से घास और फूल वाला निशान पार्टी की पहचान के साथ जुड़ गया।

ममता बनर्जी ने तैयार किया था निशान?
तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से जुड़ी कई रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि पार्टी के चुनाव चिह्न का मूल स्केच ममता बनर्जी ने खुद तैयार किया था। बताया जाता है कि इसमें घास से निकलते दो फूलों को दिखाया गया था। बाद में यही डिजाइन पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न के रूप में सामने आया। हालांकि, इस दावे को खबर में पार्टी से जुड़े दावे/रिपोर्टों के रूप में ही देखना उचित है।

आखिर क्यों फ्रीज हुआ TMC का नाम और सिंबल?
तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुटों के बीच विवाद चुनाव आयोग तक पहुंचा। आयोग ने 17 सितंबर के अंतरिम आदेश में कहा कि दोनों पक्ष खुद को मान्यता प्राप्त पार्टी के रूप में पेश कर रहे हैं। ऐसे में विवाद का अंतिम फैसला होने तक मूल पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जा सकती। आयोग ने दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न चुनने को कहा था। यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों के उद्देश्य से है और अंतिम निर्णय तक लागू रहेगी।

अब नए नाम और नए निशान के साथ चुनाव
चुनाव आयोग के 18 सितंबर के फैसले के बाद ममता बनर्जी का गुट ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम से और फुटबॉल खिलाड़ी के निशान के साथ मैदान में होगा। अरूप रॉय का गुट ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम से लिफाफा चुनाव चिह्न इस्तेमाल करेगा। आगामी उपचुनावों में इसलिए पहली बार लंबे समय से चली आ रही TMC की पारंपरिक चुनावी पहचान के बजाय दोनों गुट अलग-अलग नाम और प्रतीकों के साथ नजर आएंगे।