उज्जैन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में अपनाने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक जुड़ा रहता है।
उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि युवाओं का धर्म के बारे में विचार करना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म की चर्चा कम सुनने को मिलती है और कई लोग इसे बुढ़ापे से जोड़कर देखते हैं।
धर्म जीवन के हर चरण में मौजूद रहता है
भागवत ने कहा कि अक्सर गीता और रामायण को लोग रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली पुस्तकें मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन के हर चरण में मौजूद रहता है और सभी चीजें किसी न किसी नियम के अनुसार संचालित होती हैं।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अहंकार में आकर यह सोचने लगता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होगी, तो वह भ्रम में पड़ जाता है।
धर्म को समझने के लिए खुले मन की जरूरत
RSS प्रमुख ने कहा कि धर्म को समझने के लिए व्यक्ति को अपने मन में पहले से बनी धारणाओं से बाहर निकलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह लोगों से अपने विचारों से मन भरने के लिए नहीं कह रहे हैं, बल्कि धर्म को समझने के लिए खुले मन से विचार करने की बात कर रहे हैं।
धर्म ही जीवन में सुख का आधार है
मोहन भागवत ने कहा कि धर्म व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक निर्धारित रहता है और उनके अनुसार धर्म ही जीवन में सुख का आधार है।
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