कोलकाता: बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को पश्चिम बंगाल सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। राज्य सरकार ने उन्हें सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग का सलाहकार नियुक्त किया है। खास बात यह है कि इस पद के साथ उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है। नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
मिथुन को मिली नई जिम्मेदारी
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, मिथुन चक्रवर्ती को सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में सलाहकार नियुक्त किया गया है। उन्हें कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा दिया गया है। इस जिम्मेदारी के तहत राज्य की कला, संस्कृति और मनोरंजन से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
मिथुन चक्रवर्ती का बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। ऐसे में सरकार में उन्हें सांस्कृतिक विभाग से जुड़ी जिम्मेदारी दिया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले ही हो चुकी थी घोषणा
मिथुन चक्रवर्ती को यह जिम्मेदारी दिए जाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी। अब सरकार की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद उनकी नियुक्ति पर मुहर लग गई है।
मिथुन को राज्य के सांस्कृतिक मामलों से जोड़ने के पीछे उनके लंबे फिल्मी अनुभव को भी अहम माना जा रहा है। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली सिनेमा में भी लंबे समय तक काम किया है और अलग-अलग दौर में दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है।
‘मृगया’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर
मिथुन चक्रवर्ती ने साल 1976 में मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इसके बाद उन्होंने कई हिंदी और बंगाली फिल्मों में काम किया। ‘डिस्को डांसर’ ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई। इसके अलावा वह ‘अग्निपथ’, ‘जल्लाद’, ‘गुरु’ और कई अन्य फिल्मों में भी नजर आए।
राजनीति में भी सक्रिय रहे मिथुन
फिल्मों के साथ मिथुन चक्रवर्ती ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और पार्टी के लिए कई चुनावों में प्रचार करते नजर आए। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी वह बीजेपी के प्रमुख स्टार प्रचारकों में शामिल रहे हैं।
अब पश्चिम बंगाल सरकार में सलाहकार की जिम्मेदारी मिलने के बाद मिथुन की राजनीतिक और सांस्कृतिक भूमिका दोनों ही चर्चा में हैं। हालांकि, सलाहकार के तौर पर उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों और अधिकारों का विस्तृत ब्योरा सरकार की ओर से अलग से स्पष्ट किया जाना बाकी है।