BRICS Business Forum 2026: शुक्रवार 11 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS 2026 को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच अधिक आर्थिक गतिविधियां और मजबूत आर्थिक सुरक्षा समूह के सदस्य देशों को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में BRICS देशों के लिए जरूरी है कि वे अपने बिजनेस संबंधों को मजबूत करें, कमर्शियल रिश्तों में विविधता लाएं और भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क तैयार करें।

BRICS बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि समूह का साझा उद्देश्य ऐसा कारोबारी माहौल तैयार करना है, जिसमें सदस्य देशों की कंपनियों के लिए नए साझेदार तलाशना, नए बाजारों तक पहुंच बनाना और सप्लाई नेटवर्क को आपस में जोड़ना आसान हो। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की आर्थिक क्षमताओं को प्रभावी कमर्शियल पार्टनरशिप में बदलना समय की जरूरत है।

आर्थिक सुरक्षा से झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी

जयशंकर ने कहा कि BRICS के संदर्भ में अधिक आर्थिक गतिविधि और आर्थिक सुरक्षा का सीधा मतलब अधिक आत्मनिर्भरता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की ऐसी क्षमता विकसित करना है, जिससे वे वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर मार्केट प्रैक्टिस, भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स और स्थिर बिजनेस माहौल जरूरी है। इसके अलावा कमर्शियल रिश्तों में विविधता, पारदर्शी ट्रेड और निवेश व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।

ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत नेटवर्क पर भी फोकस

विदेश मंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र को भी आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऊर्जा सिस्टम विकसित करने की जरूरत है, जो संभावित रुकावटों का सामना कर सकें। साथ ही, आर्थिक बदलाव के लिए ऐसे रास्ते अपनाए जाने चाहिए जो अलग-अलग देशों की परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप हों।

BRICS बिजनेस फोरम की अहम भूमिका

BRICS बिजनेस फोरम समूह के निजी क्षेत्र के साथ जुड़ने का प्रमुख मंच है। इसका आयोजन आमतौर पर BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले किया जाता है। इसमें बड़े कारोबारी प्रतिनिधि, सरकारी मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष ट्रेड, निवेश, वित्त, तकनीक और टिकाऊ आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

फोरम BRICS की आर्थिक प्राथमिकताओं को आकार देने में भी योगदान देता है। वहीं, BRICS बिजनेस काउंसिल की सिफारिशों और कारोबारी क्षेत्र के सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। फोरम के परिणाम को अक्सर BRICS शिखर सम्मेलन की घोषणाओं और आगे के कार्य कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।

ट्रेड, डिजिटल इकॉनमी और MSME पर चर्चा की उम्मीद

आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम, राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल, MSME विकास और डिजिटल ट्रेड जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा।

इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा, क्लाइमेट रेजिलिएंस, डेवलपमेंट फाइनेंस और न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा सकता है। बहुपक्षीय वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों में सुधार भी BRICS एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहने की संभावना है।

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भारत की BRICS प्राथमिकताएं

भारत की BRICS चेयरशिप के तहत ट्रेड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया है। आगामी चर्चाओं में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को और मजबूत करने के उपायों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।