नई दिल्ली: भारतीय विधि विशेषज्ञ डॉ. बिमल एन. पटेल ने इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के न्यायाधीश के रूप में शपथ ले ली है। हैम्बर्ग, जर्मनी स्थित ट्रिब्यूनल के मुख्यालय में उन्होंने पद की शपथ ली। इसके साथ ही उनका नौ साल का कार्यकाल शुरू हो गया है।
115 वोट हासिल कर ITLOS पहुंचे बिमल पटेल
बिमल पटेल को पिछले साल न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुए चुनाव में ITLOS के न्यायाधीश के रूप में चुना गया था। उन्हें कुल 168 वैध मतों में से 115 वोट मिले थे। उनके साथ घाना की सिल्विया अमा अडुसु, ब्राजील के जॉर्ज रोड्रिगो बांदेरा गालिंडो, ट्यूनीशिया के स्लिम लाघमानी और वियतनाम की लैन-अन्ह थी गुयेन भी न्यायाधीश चुने गए थे। इन पांचों ने अब शपथ ली है।
पटेल ने भारतीय न्यायविद् नीरू चड्ढा की जगह ली है। चड्ढा का कार्यकाल सितंबर के अंत में पूरा हुआ। इस तरह ITLOS में भारत का प्रतिनिधित्व लगातार बना हुआ है।
कौन हैं बिमल पटेल?
बिमल पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ हैं। वह संयुक्त राष्ट्र की International Law Commission के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने गुजरात स्थित Rashtriya Raksha University के कुलपति के रूप में भी काम किया है। वह भारत के National Security Advisory Board से भी जुड़े रहे हैं।
पटेल ने अंतरराष्ट्रीय कानून में Leiden University, Netherlands और Jaipur National University से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की है। कानून और समुद्री मामलों से जुड़े विषयों पर उनका अकादमिक और पेशेवर अनुभव रहा है।
क्या है ITLOS?
International Tribunal for the Law of the Sea यानी ITLOS समुद्र और समुद्री कानून से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों की सुनवाई करने वाली स्वतंत्र न्यायिक संस्था है। इसकी स्थापना 1982 के United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के तहत हुई और इसका मुख्यालय जर्मनी के हैम्बर्ग में है।
ITLOS समुद्री सीमाओं, नौवहन, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और समुद्री पर्यावरण जैसे मामलों से जुड़े विवादों में UNCLOS की व्याख्या करता है। ट्रिब्यूनल में कुल 21 स्वतंत्र न्यायाधीश होते हैं। इनके कार्यकाल नौ साल के होते हैं और हर तीन साल में लगभग एक-तिहाई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
समुद्री सीमाओं, नौवहन, समुद्री संसाधनों और समुद्री पर्यावरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियम भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में ITLOS में भारतीय विशेषज्ञ की मौजूदगी भारत को समुद्री कानून से जुड़े वैश्विक न्यायिक मंच पर निरंतर प्रतिनिधित्व देती है। बिमल पटेल का नौ साल का कार्यकाल 2026 से 2035 तक रहेगा।
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