नई दिल्ली: केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सोमवार को कहा कि इंडिया केम 2026 के ज़रिए रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत, आत्मनिर्भरता और नवाचार उद्योगों को एक मंच पर लाया जाएगा। मुंबई में 22 से 24 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में सेक्टर के भविष्य और समृद्धि सहयोग पर चर्चा होगी।

22 से 24 अक्टूबर तक मुंबई में इंडिया केम 2026

अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इंडिया केम 2026 एशिया का सबसे बड़ा रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से जुड़े आयोजन है। इसमें भारत और दुनिया भर से इस क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि, उद्योग जगत के लोग, इनोवेटर और शोधकर्ता हिस्सा लेंगे।

उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। आयोजन के दौरान सेक्टर के भविष्य का खाका तैयार करने के साथ कई विक्रेताओं पर भी चर्चा होगी।

1,000 करोड़ रुपये की ‘भव्य रसायन योजना’

केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार ने देश में तीन बड़े केमिकल पार्क स्थापित करने के लिए ‘भव्य रसायन योजना’ शुरू की है। इसके तहत केंद्र सरकार 1,000 करोड़ रुपये की सहायता देगी, जबकि राज्यों को न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करना होगा।

सरकार की ओर से योजना के लिए दिशानिर्देश जारी किए जा चुके हैं। अनुप्रिया पटेल ने राज्यों और उद्योग जगत से जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने की अपील की है।

2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक एक विकसित और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका होगी और रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

R&D और नई योजनाओं पर सरकार का फोकस

उन्होंने रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) योजना के दायरे में शामिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पटेल ने कहा कि नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर, FDI नियमों और विभिन्न देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) जैसी सरकार की पहलें भी रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश और विकास को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत को वैश्विक केमिकल और पेट्रोकेमिकल हब के रूप में स्थापित करने में इन अभियानों की भूमिका होगी।

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