दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जाहिर की है। फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन और किराना कमेटी दिल्ली ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र भेजकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि त्योहारों के बीच इस बड़े राजनीतिक आयोजन से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापार और यातायात व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दिवाली से पहले कारोबार प्रभावित होने की आशंका
व्यापारिक संगठनों के मुताबिक, धनतेरस से दिवाली तक दिल्ली में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद रहती है। यह समय दुकानदारों और थोक व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में से एक है। ऐसे में रैली के आयोजन से ग्राहकों की आवाजाही कम हो सकती है और व्यापारिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारियों ने अपने पत्र में दावा किया है कि सितंबर और अक्टूबर के दौरान विरोध प्रदर्शनों, राजनीतिक रैलियों और ट्रैफिक प्रतिबंधों की वजह से कारोबार को पहले ही करीब 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। संगठनों ने आशंका जताई है कि अगर त्योहारों के व्यस्त समय में एक और बड़ी रैली होती है, तो व्यापारियों को 10 हजार करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ सकता है।
20 से ज्यादा बाजारों पर पड़ सकता है असर
व्यापारिक संगठनों ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के आसपास लगभग पांच किलोमीटर के क्षेत्र में सदर बाजार, खारी बावली और चांदनी चौक जैसे बड़े बाजार मौजूद हैं। इस इलाके में करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार संचालित होते हैं।
उनका कहना है कि रैली के कारण सड़कों पर भीड़ बढ़ने, यातायात प्रतिबंध लगाए जाने और कई रास्तों के बंद होने की संभावना है। इससे बाजारों तक ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है, साथ ही दुकानों तक माल पहुंचाने और सामान की आपूर्ति की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
अखिलेश और ममता से कांग्रेस नेतृत्व के सामने मुद्दा उठाने की अपील
दोनों व्यापारिक संगठनों ने अखिलेश यादव और ममता बनर्जी से आग्रह किया है कि वे इस मामले को इंडिया गठबंधन के कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष रखें और रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की पहल करें।
व्यापारियों का तर्क है कि किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम की तारीख बदली जा सकती है, लेकिन त्योहारों के दौरान होने वाले कारोबार का नुकसान बाद में पूरा करना आसान नहीं होता, उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार प्रभावित होने से केवल दुकानदारों को ही नहीं, बल्कि मजदूरों, डिलीवरी कर्मचारियों और बाजारों से जुड़े दूसरे लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा।
इसी वजह से व्यापारिक संगठनों ने राजनीतिक दलों से त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रैली की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।