रायसेन: मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने रायसेन के उदयपुरा में बासमती धान उत्पादक किसानों के साथ संवाद किया और केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश को GI टैग नहीं मिलने का फायदा दूसरे राज्यों के व्यापारी उठा रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

किसानों से संवाद में उठाया GI टैग का मुद्दा

15 सितंबर को उदयपुरा स्थित उदय पैलेस में गैर-दलीय बासमती उत्पादक किसान संवाद का आयोजन किया गया। इसमें रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर और मंदसौर समेत अलग-अलग जिलों से बासमती धान उत्पादक किसान पहुंचे। किसानों ने उत्पादन, बाजार में उचित मूल्य, बासमती की पहचान और निर्यात से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। उनका दावा है कि प्रदेश में पैदा होने वाला बासमती चावल बेहतर गुणवत्ता का है, लेकिन GI टैग नहीं होने के कारण किसानों को इसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दूसरे राज्यों के व्यापारी फायदा उठा रहे: दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल पर अपने राज्यों के GI टैग का इस्तेमाल कर निर्यात का लाभ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मध्य प्रदेश के किसानों को अपनी ही उपज की सही पहचान और बेहतर कीमत का फायदा नहीं मिल रहा। उन्होंने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के बासमती उत्पादकों को उनकी फसल के लिए अलग पहचान मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक GI टैग मिलने से किसानों को घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के क्षेत्र में भी बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

2013 और 2016 को लेकर क्या बोले दिग्विजय सिंह?

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में दावा किया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल के GI टैग का मुद्दा उठाया था और इसे स्वीकृति मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। सिंह ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग दोहराई।

GI टैग मिलने से किसानों को क्या फायदा होगा?

दिग्विजय सिंह के मुताबिक, मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिलने से प्रदेश की उपज को अलग भौगोलिक पहचान मिलेगी। इससे किसानों को अपनी फसल की ब्रांड पहचान मजबूत करने और बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने दावा किया कि GI टैग मिलने के बाद मध्य प्रदेश से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे बासमती उत्पादक किसानों की आय और बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

किसानों ने भी रखीं अपनी समस्याएं

किसान संवाद में पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव दिग्विजय सिंह के सामने रखे और मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती उत्पादकों के हित में GI टैग का मुद्दा लगातार उठाया जाता रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के हित में इस मामले पर जल्द फैसला लेने की मांग की।

Reported by: M. Athar Uddin Munne Bharti

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