DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव में इस बार मुकाबला सिर्फ ABVP और NSUI के बीच आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है। चुनावी मैदान में विपक्षी खेमे से जुड़े तीन बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने मुकाबले के समीकरण को और पेचीदा कर दिया है।

चार प्रमुख पदों में से तीन पर NSUI के बागी उम्मीदवारों के उतरने से संगठन के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या बंटा हुआ विपक्षी वोट ABVP के लिए चुनावी बढ़त का रास्ता खोल सकता है।

तीन पदों पर NSUI के बागी मैदान में

इस बार NSUI से जुड़े तीन बागी उम्मीदवार अलग होकर चुनाव लड़ रहे हैं। अध्यक्ष पद पर समर्थ बेनीवाल, उपाध्यक्ष पद पर हिमांशु शौकीन और सह सचिव पद पर विशेष यादव मैदान में हैं।इन उम्मीदवारों की मौजूदगी का सबसे बड़ा असर वोटों के बंटवारे पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। अगर NSUI के समर्थक वोट अलग-अलग उम्मीदवारों में बंटते हैं, तो इसका सीधा फायदा उस उम्मीदवार को मिल सकता है जो अपेक्षाकृत कम वोटों में जीत की स्थिति में पहुंच जाए।यही वजह है कि NSUI के सामने अब सिर्फ अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने की चुनौती नहीं है, बल्कि बागी उम्मीदवारों के प्रभाव को भी सीमित करना अहम होगा।

ABVP के लिए क्यों आसान हो सकता है मुकाबला?

DUSU चुनाव में आमतौर पर ABVP और NSUI के बीच सीधी टक्कर पर सबसे ज्यादा नजर रहती है। ऐसे में किसी एक संगठन के वोटों का बंटना चुनावी नतीजे पर असर डाल सकता है।NSUI के तीन बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी से संगठन का पारंपरिक वोट बैंक कमजोर पड़ता है तो ABVP उम्मीदवारों को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि इसे अभी ABVP की जीत की गारंटी नहीं माना जा सकता, क्योंकि चुनाव में मतदान के दौरान छात्रों की प्राथमिकताएं और स्थानीय मुद्दे भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

सामाजिक प्रतिनिधित्व के जरिए NSUI का नया प्रयोग

NSUI ने इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया है। वह आदिवासी समाज से आने वाले छात्र नेता हैं। संगठन इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है।वहीं उपाध्यक्ष पद पर वीर चतरथ को उम्मीदवार बनाया गया है। उनके पिता मनीष चतरथ कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। ऐसे में इस सीट पर भी संगठन की रणनीति और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ दोनों महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।

सचिव पद पर महिला उम्मीदवारों के बीच मुकाबला

चार प्रमुख पदों में सचिव पद का मुकाबला भी खास माना जा रहा है। इस सीट पर ABVP और NSUI दोनों ने महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।छात्र राजनीति पर नजर रखने वालों के मुताबिक इस सीट पर दोनों संगठनों के बीच सीधी और करीबी टक्कर देखने को मिल सकती है। यहां उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता, कैंपस में पकड़ और चुनाव प्रचार की रणनीति नतीजे पर असर डाल सकती है।

क्या बागियों से बदल जाएगा DUSU चुनाव का समीकरण?

फिलहाल चुनावी तस्वीर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि NSUI से अलग होकर मैदान में उतरे उम्मीदवार कितना वोट काटते हैं। अगर बागी उम्मीदवारों को पर्याप्त समर्थन मिलता है तो इसका असर NSUI के उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं पर पड़ सकता है।दूसरी तरफ NSUI अगर अपने मुख्य वोट बैंक को एकजुट रखने में सफल रहती है तो बागी उम्मीदवारों का प्रभाव सीमित भी हो सकता है। इसलिए चुनाव नतीजे आने तक ABVP को बढ़त मिलने की बात को संभावित समीकरण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।