Betul Khandwa Four Lane: मध्य प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को बड़ा बूस्ट मिलने वाला है। बैतूल-खंडवा के बीच 233.653 किलोमीटर लंबे फोरलेन प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। करीब 4,415.60 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी महाराष्ट्र और गुजरात तक और मजबूत होगी। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इंदौर से नागपुर का सफर करीब 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है।
13-14 घंटे का सफर घटकर 6 घंटे होने की उम्मीद
बैतूल-खंडवा फोरलेन का सबसे बड़ा फायदा इंदौर-नागपुर रूट को मिलने वाला है। अभी दोनों शहरों के बीच सड़क मार्ग से सफर में करीब 13 से 14 घंटे लगते हैं। नए फोरलेन और संबंधित कॉरिडोर के अपग्रेड होने के बाद यह समय घटकर करीब 6 घंटे होने का दावा किया जा रहा है।
यह मार्ग NH-47, NH-753 और NH-52 जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। इंदौर से हरदा-बैतूल होते हुए नागपुर जाने वाले ट्रैफिक को भी इससे सीधा फायदा मिलेगा।
MP से महाराष्ट्र और गुजरात तक सीधी कनेक्टिविटी
इस परियोजना से मध्य प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इंदौर, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी जैसे शहरों के बीच आवागमन आसान होगा।
वहीं महाराष्ट्र के नागपुर, जलगांव, भुसावल, अकोला, वाशिम, हिंगोली और नांदेड़ जैसे शहरों तक पहुंच बेहतर होगी। गुजरात की ओर अहमदाबाद और वडोदरा जैसे बड़े शहरों से भी कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है।
निमाड़ और मालवा को मिलेगा बड़ा फायदा
बैतूल-खंडवा-जुलवानिया कॉरिडोर से मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे प्रमुख जिलों की कनेक्टिविटी बैतूल और छिंदवाड़ा की ओर से आने वाले ट्रैफिक के साथ बेहतर होगी।
बैतूल, छिंदवाड़ा और नागपुर की ओर से आने वाला यातायात खंडवा के रास्ते इंदौर और भोपाल की तरफ तेजी से पहुंच सकेगा। इससे क्षेत्र में व्यापार और माल ढुलाई को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सिंहस्थ-2028 में भी साबित होगा अहम
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 को देखते हुए भी यह कॉरिडोर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फोरलेन के जरिए महाराष्ट्र और गुजरात की ओर से आने वाले यात्रियों को मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।
विशेष रूप से उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और खंडवा जिले के मंधाता स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच यातायात को बेहतर तरीके से मैनेज करने में यह सड़क नेटवर्क मददगार हो सकता है।
4,415 करोड़ का प्रोजेक्ट, पहले 4 लेन फिर 6 लेन की तैयारी
केंद्र सरकार ने जून 2026 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 4,415.60 करोड़ रुपये और कुल लंबाई 233.653 किलोमीटर है। शुरुआत में इसे चार लेन में विकसित किया जाएगा, जबकि भविष्य में इसे छह लेन में अपग्रेड करने की योजना है।
फिलहाल NHAI की ओर से परियोजना की DPR तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। मंजूरी के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जनवरी 2027 से काम शुरू होने की संभावना है।
ब्लैक स्पॉट होंगे खत्म, तेज रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन
प्रोजेक्ट में सड़क सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत मार्ग के ब्लैक स्पॉट खत्म किए जाने हैं। इससे सड़क हादसों का जोखिम कम करने और यातायात को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। बेहतर सड़क बनने के बाद वाहनों की रफ्तार भी बढ़ सकेगी।
फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। परियोजना के 2029 के अंत या 2030 की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इंदौर-नागपुर के साथ लॉजिस्टिक्स को भी मिलेगा बूस्ट
यह कॉरिडोर सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इंदौर के मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, इंदौर और नागपुर एयरपोर्ट तथा बैतूल-खंडवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से बेहतर कनेक्टिविटी बनने से मध्य प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है।
अगर परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के बीच सड़क संपर्क का महत्वपूर्ण कॉरिडोर बन सकती है।