Delhi JJ Cluster Rehabilitation: दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी यानी JJ क्लस्टर्स में रहने वाले लोगों के लिए इन-सिटू पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत चिन्हित JJ क्लस्टर्स के पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है।
DDA की ओर से 15 प्रोजेक्ट्स के लिए Request for Proposal (RFP) जारी किया गया है। इन प्रोजेक्ट्स के लिए तीन Transaction Advisors नियुक्त किए जाएंगे, जो अलग-अलग इलाकों में पुनर्वास की व्यवहार्यता का अध्ययन करेंगे।
45 JJ क्लस्टर्स में 21 हजार से ज्यादा परिवार
DDA के मुताबिक जिन 15 प्रोजेक्ट्स को शुरुआती स्तर पर शामिल किया गया है, उनमें कुल 45 JJ क्लस्टर्स हैं। इनमें करीब 21,229 परिवार रहते हैं।इन बस्तियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 135.74 एकड़ है। प्रस्तावित इन-सिटू रिहैबिलिटेशन योजना से एक लाख से अधिक लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।इस योजना का उद्देश्य सिर्फ घर उपलब्ध कराना नहीं है। पुनर्वास के साथ इन इलाकों में सड़क, पानी, सीवर, बिजली और दूसरी जरूरी नागरिक सुविधाओं को बेहतर तरीके से विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
Transaction Advisors करेंगे पूरी योजना की जांच
DDA ने Transaction Advisors की नियुक्ति के लिए ऐसे संस्थानों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो Department of Economic Affairs (DEA) या National Land Monetisation Corporation (NLMC) के पैनल में शामिल हैं।चयनित सलाहकार इन परियोजनाओं की पूरी व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेंगे। इन रिपोर्ट्स के आधार पर आगे की परियोजना संरचना और वित्तीय मॉडल तैयार किए जाएंगे।
Master Plan 2047 में करीब 17 लाख लोगों पर फोकस
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में राजधानी की JJ बस्तियों के इन-सिटू पुनर्वास को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। योजना के तहत दिल्ली में मौजूद 650 से ज्यादा JJ क्लस्टर्स में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों को बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस मॉडल में लोगों को उसी क्षेत्र या उसके आसपास विकसित किए जाने वाले आवास में बसाने की कोशिश की जाती है, ताकि उन्हें अपने मौजूदा काम, स्कूल, परिवहन और सामाजिक माहौल से पूरी तरह अलग न होना पड़े। DDA के अनुसार मौजूदा पहल इसी व्यापक लक्ष्य को जमीन पर उतारने की दिशा में शुरुआती महत्वपूर्ण कदम है।
पुनर्वास के साथ जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल
DDA का कहना है कि योजना का फायदा सिर्फ JJ क्लस्टर्स में रहने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा। पुनर्वास के बाद उपलब्ध जमीन का नियोजित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए आवासीय और व्यावसायिक जगह भी विकसित होने की संभावना है। इससे दिल्ली में अतिरिक्त हाउसिंग स्टॉक तैयार हो सकता है। DDA के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया को तकनीकी और वित्तीय रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि परियोजनाओं को व्यवस्थित, पारदर्शी और लंबे समय तक टिकाऊ तरीके से लागू किया जा सके।
दिल्ली के शहरी विकास में बड़ा कदम
DDA ने इस पहल को राजधानी के समावेशी शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। इसका फोकस JJ क्लस्टर्स में रहने वाले परिवारों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाएं देने के साथ दिल्ली के उपलब्ध भूमि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। अगर प्रस्तावित परियोजनाएं व्यवहार्यता अध्ययन के बाद आगे बढ़ती हैं, तो 45 JJ क्लस्टर्स में रहने वाले हजारों परिवारों की आवासीय स्थिति में बदलाव आ सकता है।