Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में हवा जहरीली हो चुकी है। लगातार दमघोंटू फिज़ा ने लोगों को बिमार बना दिया है। दोपहर के समय प्रदूषण की परत आसमान में घने कोहरे की छाई रहती है। दिल्ली में AQI 400 के आंकड़े को छू रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बड़ा सवाल करते हुए कहा कि उम्मीद है, आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।
मौसम का आनंद ले रहे होंगे
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सरकार से पूछा है कि इस गंभीर स्थिति को रोकने के लिए तत्काल क्या आपातकालीन कदम (Emergency Steps) उठाए जा रहे हैं, जबकि AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) लगातार 400 के पार पहुंच रहा है। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें और टिप्पणियां (6 नवंबर 2026)
तीव्र प्रदूषण पर चिंता: CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में AQI का 400 के स्तर को छूना और 'खराब' हवा अब सामान्य बात बनती जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।
वाहनों का प्रदूषण: कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली और इससे सटे इलाकों (गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा) को जोड़ने वाली सड़कों पर भारी ट्रैफिक और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।
गरीबों को न ठहराएं जिम्मेदार: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण के लिए गरीब लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि गरीब लोग प्रदूषण फैलाने वाले नहीं बल्कि इसके सबसे अधिक शिकार होते हैं।
पराली और फसल बुवाई: कोर्ट ने कहा कि यह समय किसानों की अगली फसल की बुवाई का है, ऐसे में पराली जलाने की घटनाएं अब तक पूरी तरह रुक जानी चाहिए थीं।
एमिकस क्यूरी की दलील: सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली के लोग रोजाना लगभग 30 सिगरेट पीने जितनी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
AQI 400 तक पहुंच गया, आखिर क्या कर रहे हैं?
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम लगातार इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं और सुझाव दे रहे हैं, लेकिन AQI पहले ही 400 के करीब पहुंच चुका है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि केवल चर्चा और निर्देशों से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
निजी गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली और NCR की सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या पर चिंता जताई। पीठ ने सवाल किया कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार क्यों माना जा रहा है? बड़े और महंगे निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं? अदालत ने दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच भारी यातायात को भी प्रदूषण का बड़ा कारण बताया।
पराली जलाने पर किसानों को पहले से मिले उचित कीमत
सुप्रीम कोर्ट ने पराली प्रबंधन को लेकर भी अहम सुझाव दिए। CJI ने कहा कि किसानों को पराली बेचने के लिए उसकी खरीद की कीमत पहले से घोषित की जानी चाहिए, ताकि किसान फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे बेच सकें। अदालत ने ग्राम पंचायतों को भी पराली के संग्रह और प्रबंधन की व्यवस्था से जोड़ने की जरूरत बताई।
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