US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा रखी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सैन्य कार्रवाई, कूटनीतिक बातचीत और वैश्विक आर्थिक दबाव जैसी कई चुनौतियां हैं।
दूसरी तरफ ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी बीच ईरान ने एक बार फिर ट्रंप के सामने 7 शर्तें रख दी है। जिसने प्रतिबंध से लेकर परमाणु कार्यक्रम तक शामिल है।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 बड़ी शर्तें
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात ईरान की ओर से रखी गई सात शर्तें हैं। 5 नवंबर को रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, तेहरान ने साफ किया है कि इन शर्तों पर अमेरिकी कदम उठाए जाने के बाद ही आगे बातचीत होगी।
ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना शामिल है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और क्षेत्र में सैन्य तनाव कम करने जैसे मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा हैं।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने भी कहा है कि जब तक अमेरिका इन शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला जाएगा और बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका बना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजहों में होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
ईरान की ओर से इस रास्ते पर नियंत्रण और जहाजों की आवाजाही को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है।
इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। अगर होर्मुज में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
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