Pakistan: द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे और महिलाएं कुपोषण से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा गरीबी, खाद्य असुरक्षा और पोषण संबंधी कमियों से निपटने के देश के प्रयासों में बनी हुई कमियों को उजागर करता है।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, पंजाब उच्च शिक्षा आयोग के अध्यक्ष प्रो. डॉ. इकरार अहमद खान ने जोर दिया है कि पोषण संबंधी बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदारों को एक साथ लाने की आवश्यकता है। बता दें कि पाकिस्तान में स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।
पाकिस्तान में 40 फीसदी बच्चे स्टंटिंग के शिकार
विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में पांच साल से कम उम्र के लगभग 40 फीसदी बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित हैं। स्टंटिंग का मतलब है कि उम्र के हिसाब से बच्चे की लंबाई सामान्य से कम रह जाना। यह समस्या लंबे समय तक पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिलने, बार-बार बीमार पड़ने और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण पैदा हो सकती है।
इसका असर सिर्फ बच्चों की लंबाई तक सीमित नहीं रहता। कुपोषण बच्चों के शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और भविष्य में उनकी उत्पादकता को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि पाकिस्तान में पोषण संकट को अब केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
बाढ़, सूखा और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किल
पाकिस्तान में पोषण संकट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। 2025 के मानसूनी बाढ़ के असर, सूखे और लंबे समय तक बारिश की कमी ने कृषि और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को प्रभावित किया है।
जब फसलें खराब होती हैं, तो किसानों की आमदनी घटती है और बाजार में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता तथा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी तरफ बेरोजगारी और कमजोर क्रय शक्ति के कारण गरीब परिवार पौष्टिक भोजन खरीदने में असमर्थ हो जाते हैं।
ACAPS की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा के साथ जलवायु संबंधी झटके और बड़े पैमाने पर विस्थापन भी मानवीय संकट को जटिल बना रहे हैं।
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