नई दिल्ली: केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT-Hyderabad) में प्रस्तावित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर आपत्ति जताई है।
फिल्म ‘Prisoner No. 626710 is Present’ को शुक्रवार रात 8 बजे IIIT-हैदराबाद के KRB ऑडिटोरियम में छात्रों के एक समूह की ओर से दिखाने का प्रस्ताव था। यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता ललित वाचानी ने बनाई है, जो जेल में बंद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद के मामले पर आधारित है।
डॉक्यूमेंट्री को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से प्रमाणन नहीं मिला है
CBFC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ऐसी कोई भी डॉक्यूमेंट्री जिसे बोर्ड से प्रमाणन नहीं मिला है, उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सकता, जब तक कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत विशेष छूट न ली गई हो।
CBFC ने अपने पोस्ट में कहा, “ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग, जिसे अभी तक CBFC प्रमाणन नहीं मिला है, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का उल्लंघन है, जब तक कि इसके तहत विशेष छूट प्राप्त न की गई हो।”
बोर्ड ने IIIT-हैदराबाद को टैग करते हुए मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
Public Screening of a Documentary film that has not yet been Certified by the CBFC is a violation of the Cinematograph Act unless a specific exemption has been sought under the Act. Authorities of @iiit_hyderabad may take note for necessary action. pic.twitter.com/KeZlkbqrFn
— CBFC केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (@CBFC_Bharat) September 17, 2026
उमर खालिद की गिरफ्तारी से जुड़े मामले पर केंद्रित है डॉक्यूमेंट्री
यह डॉक्यूमेंट्री उमर खालिद की गिरफ्तारी और उससे जुड़े मामले पर केंद्रित है। उमर खालिद को सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) समेत कई धाराओं के तहत आरोप हैं और वह गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में हैं।
बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग
इससे पहले इसी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु में भी टाल दी गई थी। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने स्क्रीनिंग का विरोध किया था और कार्यक्रम रद्द करने की मांग की थी।
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