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लोकसभा में महा-बदलाव: अब 543 नहीं, सदन में बैठेंगे 816 सांसद!
बजट सत्र 2026: लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर हो सकती हैं 816। महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सरकार ला सकती है नया बिल। जानिए इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बारे में विस्तार से।
दिल्ली की राजनीति में इन दिनों काफी हलचल है। खबर है कि सरकार संसद के मौजूदा बजट सत्र को कुछ दिनों के लिए और बढ़ा सकती है। वैसे तो यह सत्र 2 अप्रैल को खत्म होना था, लेकिन अब माना जा रहा है कि सरकार इसे अप्रैल के तीसरे हफ्ते तक खींच ले जाएगी। इसके पीछे की बड़ी वजह कोई साधारण काम नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में एक बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी है।
लोकसभा की सीटों में होगा भारी इजाफा
बजट सत्र की अवधि बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ी वजह लोकसभा की सीटों में होने वाला बड़ा इजाफा माना जा रहा है। अभी हमारे यहाँ लोकसभा में 543 सांसद बैठते हैं, लेकिन सरकार की योजना इसे सीधे बढ़ाकर 816 करने की है। सरकार का मानना है कि देश की आबादी काफी बढ़ गई है, इसलिए सांसदों की संख्या भी बढ़नी चाहिए ताकि हर क्षेत्र की जनता की बात संसद में ठीक से रखी जा सके। इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए सरकार इसी सत्र में एक नया बिल भी ला सकती है।
महिलाओं के लिए खुलेंगे संसद के दरवाजे
सीटों को बढ़ाने का सीधा कनेक्शन महिला आरक्षण से भी जुड़ा है। अगर सीटें बढ़कर 816 हो जाती हैं, तो उनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए पक्की (आरक्षित) कर दी जाएंगी। बड़ी बात यह है कि सरकार इसके लिए नई जनगणना का इंतजार नहीं करना चाहती। चर्चा है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही सीटों का बंटवारा कर दिया जाएगा ताकि 2029 के चुनाव तक महिलाओं को उनका हक मिल सके।
विपक्ष की बढ़ी धड़कनें
इतने बड़े फैसले पर राजनीति होना तो तय है। खबर है कि सरकार ने अपने कुछ साथी दलों से तो बात कर ली है, लेकिन कांग्रेस और ममता बनर्जी की पार्टी जैसी बड़ी विपक्षी पार्टियों से अभी तक कोई मशविरा नहीं हुआ है। विपक्ष को इस बात का डर है कि सीटों की संख्या बढ़ने से उत्तर भारत के राज्यों का पलड़ा भारी हो जाएगा और दक्षिण भारत के राज्यों की अहमियत कम हो सकती है। इसी वजह से आने वाले दिनों में संसद में काफी हंगामा देखने को मिल सकता है।
सरकार ने लिया परिसीमन आयोग का सहारा
इन सब बदलावों को सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार एक 'परिसीमन आयोग' का सहारा लेगी। यह एक ऐसी स्वतंत्र संस्था होती है जो तय करती है कि किस इलाके की सीमा कहाँ तक होगी और वहां से कितने सांसद चुने जाएंगे। खास बात यह है कि इस आयोग के फैसले को कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो 2029 तक देश की संसद का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाएगा।
Written by: Anushka sagar
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