एक्सप्रेसवे पर सफर करते समय ऊपर से हमें सिर्फ एक चौड़ी और चिकनी सड़क दिखाई देती है। लेकिन इस सड़क के नीचे कई ऐसी परतें होती हैं, जो इसे भारी ट्रैफिक, तेज रफ्तार और बदलते मौसम का सामना करने की ताकत देती हैं। यही वजह है कि एक्सप्रेसवे को सामान्य सड़क के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत तरीके से तैयार किया जाता है।

जमीन से शुरू होता है पूरा खेल
एक्सप्रेसवे बनाने से पहले सबसे जरूरी काम जमीन को तैयार करना होता है। इंजीनियर मिट्टी की जांच करते हैं और उसकी मजबूती का आकलन करते हैं। जहां जमीन कमजोर होती है, वहां उसे मजबूत करने के उपाय किए जाते हैं। इसके बाद जमीन को सही ऊंचाई और ढलान देकर दबाया जाता है। इसे सबग्रेड कहा जाता है। यही एक्सप्रेसवे की पूरी सड़क का आधार होता है। अगर नींव मजबूत नहीं होगी तो ऊपर कितनी भी अच्छी सड़क बना दी जाए, लंबे समय में परेशानी आ सकती है।

सड़क के नीचे बिछती हैं कई परतें
एक्सप्रेसवे की असली मजबूती उसकी ऊपरी सतह से ज्यादा नीचे की परतों में होती है। सबग्रेड के ऊपर GSB यानी Granular Sub-Base और उसके बाद बेस लेयर तैयार की जाती है। इन परतों का काम वाहनों के वजन को एक जगह पड़ने से रोककर उसे बड़े क्षेत्र में फैलाना होता है। इसके बाद एक्सप्रेसवे की डिजाइन के अनुसार डामर या कंक्रीट की परत तैयार की जाती है।

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दो तरह की तकनीक का होता है इस्तेमाल
एक्सप्रेसवे में मुख्य रूप से फ्लेक्सिबल पेवमेंट और रिजिड पेवमेंट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। फ्लेक्सिबल पेवमेंट में बिटुमिनस यानी डामर की कई परतें होती हैं। वहीं रिजिड पेवमेंट में सीमेंट-कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाता है। कंक्रीट वाली सड़क में मजबूत बेस के ऊपर PQC यानी Pavement Quality Concrete की परत तैयार की जाती है। किस तकनीक का इस्तेमाल होगा, यह सड़क की डिजाइन, ट्रैफिक, मिट्टी, मौसम और परियोजना की जरूरतों पर निर्भर करता है।

30 साल की लाइफ का क्या मतलब?
कई एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में सड़क को लंबी डिजाइन अवधि के हिसाब से तैयार किया जाता है। कंक्रीट पेवमेंट के मामले में करीब 30 साल की डिजाइन अवधि का लक्ष्य रखा जा सकता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 30 साल पूरे होते ही सड़क खराब हो जाएगी। सड़क की वास्तविक उम्र उसके निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर काफी निर्भर करती है। समय पर मरम्मत, रीसर्फेसिंग और नियमित निरीक्षण से सड़क की उपयोगी उम्र काफी बढ़ाई जा सकती है।

पानी सड़क का सबसे बड़ा दुश्मन क्यों?
एक्सप्रेसवे को मजबूत बनाने में सिर्फ सड़क की परतें ही नहीं, बल्कि ड्रेनेज सिस्टम भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। बारिश का पानी अगर सड़क की परतों के अंदर जमा हो जाए तो धीरे-धीरे उसकी नींव कमजोर हो सकती है। इसीलिए सड़क पर सही ढलान, नालियों और पानी की निकासी की व्यवस्था की जाती है, ताकि बारिश का पानी जल्दी बाहर निकल सके।

सिर्फ सड़क नहीं, पूरा इंजीनियरिंग सिस्टम
एक्सप्रेसवे को सिर्फ डामर या कंक्रीट की सड़क समझना सही नहीं होगा। इसके निर्माण में मिट्टी की जांच से लेकर सड़क की कई परतें, ड्रेनेज, पुल-पुलिया, इंटरचेंज, क्रैश बैरियर और सुरक्षा इंतजाम तक शामिल होते हैं।

यानी जिस एक्सप्रेसवे पर हम कुछ ही घंटों में लंबी दूरी तय कर लेते हैं, उसके पीछे सालों की प्लानिंग, इंजीनियरिंग और मजबूत नींव काम करती है। यही इसकी लंबी उम्र और तेज रफ्तार ट्रैफिक को संभालने की सबसे बड़ी वजह है।