शोहाउस द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय रेजिडेंशियल आर्ट्स और म्यूज़िक फेस्टिवल 24 से 26 जुलाई तक गोवा के ताज एक्सोटिका रिज़ॉर्ट एंड स्पा में आयोजित हुआ। बाहर कोस्टल मॉनसून की बारिश और अंदर गूंजते दिल छू लेने वाले रागों ने ऐसा माहौल बनाया, जिसमें संगीत को सुनना महज़ एक परफॉर्मेंस देखना नहीं, बल्कि उसे महसूस करना बन गया।

दानिश हुसैन के नाटक ने छुआ दिल

फेस्टिवल में मेरी मुलाकात लगभग सभी कलाकारों से हुई। इनमें दानिश हुसैन सबसे खास रहे, जिन्होंने अपना म्यूज़िकल प्ले मैं पल दो पल का शायर हूं प्रस्तुत किया। नाटक इतना खूबसूरत और भावनात्मक था कि मेरी आंखों में आंसू आ गए।

दानिश से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट कैसे शुरू हुआ और थिएटर के प्रति उनका लगाव कितना गहरा है। वह फिल्में डायरेक्ट करना भी चाहते हैं, लेकिन फिल्मों में लगने वाले लंबे समय के कारण फिलहाल उन्हें नाटक डायरेक्ट करना ज्यादा पसंद है।

कलाकारों से मुलाकातें रहीं यादगार

एक्ट्रेस गीतिका यादव से बातचीत भी बेहद दिलचस्प रही। सोनी से पहचान बनाने वाली गीतिका दानिश के प्ले का हिस्सा थीं। सिनेमा और अपने पैशन के प्रति हमारा साझा प्यार बातचीत का खास हिस्सा रहा। ऑफ-स्टेज पल भी फेस्टिवल जितने ही दिलचस्प थे। अनूप जलोटा अपने अनुभवों और किस्सों से माहौल में कॉमिक रिलीफ जोड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि वह अपने मशहूर भजन ऐसी लागी लगन के 8,000 से ज्यादा वेरिएशन कर चुके हैं।

सितार वादक शुजात खान से मुलाकात ने मुझे खास तौर पर प्रभावित किया। जब मैंने सम्मान में उनके पैर छूने की कोशिश की, तो उन्होंने उल्टा मेरे पैर छूने की कोशिश करते हुए कहा कि हम सब बराबर हैं और अपनी-अपनी जगह एक्सपर्ट हैं। युवा कलाकारों के लिए सलाह पूछने पर उनका जवाब भी खूबसूरत था, आज की युवा पीढ़ी जानती है कि उसे क्या चाहिए, इसलिए उसे बस अपने सपनों पर ध्यान देना चाहिए।

संगीत की विविधता ने बांधे रखा

फेस्टिवल की सबसे बड़ी खूबी इसकी संगीत विविधता थी। तसव्वुर एन्सेम्बल के जादुई सूफी संगीत से लेकर रोंकिनी गुप्ता के मनमोहक ख्याल और ठुमरी तक, हर प्रस्तुति ने माहौल को एक नया रंग दिया। कलाकारों से ऑफ-स्टेज बातचीत ने इस अनुभव को और व्यक्तिगत बना दिया।

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संगीत से फिर हुआ जुड़ाव

फेस्टिवल खत्म होते-होते मुझे अलग-अलग म्यूज़िक जॉनर के बीच एक अनोखा जुड़ाव महसूस हुआ। इस अनुभव ने फिर याद दिलाया कि संगीत की भाषा सच में यूनिवर्सल है। ऐसे फेस्टिवल हमें अपनी जड़ों के करीब लाते हैं और उन धुनों से दोबारा प्यार करना सिखाते हैं जिन्हें शायद हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भूल चुके हैं।

सबसे खास बात यह रही कि यहां संगीत सिर्फ़ स्टेज तक सीमित नहीं था। कलाकारों से हुई सच्ची बातचीत, शांत माहौल और अपनापन इस पूरे अनुभव को यादगार बनाते हैं। मेरे लिए यह फेस्टिवल एक कार्यक्रम से कहीं बढ़कर था,यह संगीत को नए तरीके से सुनने, महसूस करने और उससे जुड़ने का अनुभव था।