मुंबई: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच से उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि सच को कुछ समय के लिए दबाया या परेशान किया जा सकता है, लेकिन उसे हराया नहीं जा सकता।
श्वेता सिंह कीर्ति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए ‘सच की ताकत’ में अपना विश्वास जताया। उन्होंने लिखा, “सच में अपनी ताकत होती है... इसे कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता। भगवान कृष्ण हमारे मार्गदर्शक हों। सत्य की ही जीत होती है। जय श्री कृष्ण। दिशा सालियान मामले में CBI की जांच कई SSRians को भी उम्मीद दे रही है।”
सत्य की अपनी शक्ति होती है… उसे कुछ समय के लिए दबाया जा सकता है, परेशान किया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।
— Shweta Singh Kirti (@shwetasinghkirt) September 3, 2026
May Krishna be our guide. 🙏
सत्यमेव जयते।
जय श्री कृष्ण। 🙏
Disha Salian ke case main CBI inquiry is giving hope to a lot of SSRians too #DishaSalian #justice4SSR pic.twitter.com/sC1yZaBLC1
बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए निर्देश
दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।
दिशा सालियान 8 जून 2020 को मृत पाई गई थीं। इसके कुछ दिन बाद ही अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे। दिशा की मौत को पहले Accidental Death Report (ADR) के तौर पर दर्ज किया गया था।
अधिवक्ता निलेश ओझा अदालत में कर रहे पैरवी
दिशा के पिता और याचिकाकर्ता सतीश सालियान की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता निलेश ओझा ने कहा कि अदालत ने CBI को सतीश सालियान का बयान दर्ज करने, FIR दर्ज करने और जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने को कहा गया है।
ओझा ने कहा कि जिस भी व्यक्ति के खिलाफ सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना सबूत किसी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि CBI की ओर से नकारात्मक रिपोर्ट दाखिल की जाती है, तो याचिकाकर्ता को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार होगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
अधिवक्ता निलेश ओझा ने इससे पहले मामले में कथित प्रभावशाली आरोपियों और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि मामले में रिकॉर्ड पर सबूत उपलब्ध कराए गए हैं और FIR दर्ज करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट, गृह मंत्रालय और संविधान पीठ के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया।
ओझा ने दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, उनके ये दावेमामले की पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने केवल ADR दर्ज किए जाने पर चिंता जताई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि दिशा सालियान के परिवार द्वारा हत्या आरोप हैं और CBI की जांच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।
पांच साल बाद भी परिवार को नहीं मिली थी रिपोर्ट की प्रतियां
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने केवल ADR दर्ज किए जाने पर चिंता जताई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि दिशा सालियान के परिवार द्वारा हत्या के आरोप लगाए जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया था कि दिशा की मौत के पांच साल बाद भी उनके परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।
अब CBI जांच शुरू होने के बाद दिशा सालियान की मौत से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में वास्तव में क्या हुआ था और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।