दक्षिण कोरियाई ऑटोमोबाइल कंपनी ने भारतीय बाजार के लिए सिरॉस के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन का कॉन्सेप्ट पेश कर दिया है। कंपनी का यह कदम भारत में वैकल्पिक ईंधन और कम-कार्बन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई सिरॉस FFV को इस तरह विकसित किया गया है कि यह पेट्रोल के साथ अलग-अलग स्तर के इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी चल सके। इस तकनीक के साथ यह वाहन E20 से लेकर E100 तक के ईंधन को सपोर्ट करने में सक्षम होने के लिए तैयार किया गया है। फिलहाल भारतीय बाजार में सिरॉस पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन विकल्पों के साथ उपलब्ध है। ऐसे में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को जोड़कर किआ ने अपने मल्टी-पावरट्रेन पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाने का संकेत दिया है।
इंजन और गियरबॉक्स में किए गए बदलाव
Kia Syros Flex Fuel Concept में 1.0-लीटर, 3-सिलिंडर डायरेक्ट-इंजेक्शन टर्बो पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इथेनॉल की अधिक मात्रा वाले ईंधन को ध्यान में रखते हुए इसके पावरट्रेन में जरूरी तकनीकी बदलाव किए गए हैं। कंपनी ने अभी तक इस कॉन्सेप्ट के अधिकतम पावर और टॉर्क से जुड़े आंकड़े जारी नहीं किए हैं। फ्लेक्स-फ्यूल सेटअप के लिए इंजन के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम को भी दोबारा कैलिब्रेट किया गया है। इसमें अपडेटेड इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU), ट्रांसमिशन कंट्रोल यूनिट (TCU) और नया फ्यूल-डिलीवरी सिस्टम शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुसार इंजन के संचालन को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना है। दिलचस्प बात यह है कि स्टैंडर्ड सिरॉस के 7-स्पीड DCT की जगह FFV कॉन्सेप्ट में 6-स्पीड टॉर्क-कन्वर्टर ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाया गया है। यह सेटअप फ्लेक्स-फ्यूल पावरट्रेन के साथ बेहतर सामंजस्य के लिए चुना गया है।
डिजाइन में ज्यादा बदलाव नहीं
लुक की बात करें तो सिरॉस FFV कॉन्सेप्ट को देखकर यह काफी हद तक मौजूदा सिरॉस जैसा ही नजर आता है। इसके बॉडी शेप, ऊंचा और मजबूत स्टांस, वर्टिकल लाइटिंग सेटअप और प्रमुख व्हील आर्च डिजाइन को बरकरार रखा गया है। केबिन में भी कंपनी ने मौजूदा सिरॉस के मूल डिजाइन और लेआउट को ही आगे बढ़ाया है। इसमें डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, सेंटर टचस्क्रीन और क्लाइमेट कंट्रोल से जुड़े इंटरफेस जैसे फीचर्स दिखाई देते हैं। हालांकि, अगर इसका प्रोडक्शन मॉडल तैयार किया जाता है, तो ड्राइवर को इथेनॉल की मात्रा और इस्तेमाल किए जा रहे ईंधन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देने के लिए इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या इंफोटेनमेंट सिस्टम में नए डिजिटल फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।
भारत में क्यों अहम है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक?
भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू मांग का एक बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा होता है। ऐसे में सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इसी बदलते फ्यूल इकोसिस्टम को देखते हुए ऑटो कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं। मारुति सुजुकी के बाद किआ का सिरॉस FFV कॉन्सेप्ट इस दिशा में कंपनी की रणनीति को दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि किआ केवल पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित न रहकर वैकल्पिक पावरट्रेन पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।
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क्या प्रोडक्शन मॉडल आएगा?
फिलहाल सिरॉस FFV को कॉन्सेप्ट के तौर पर पेश किया गया है और इसके प्रोडक्शन में जाने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। भविष्य में यदि किआ इसका व्यावसायिक मॉडल भारतीय बाजार में उतारती है, तो इसकी सफलता केवल वाहन की तकनीक पर निर्भर नहीं करेगी। देश में E85 या E100 जैसे उच्च-इथेनॉल ईंधन की उपलब्धता, पर्याप्त संख्या में उपयुक्त फ्यूल स्टेशन, ईंधन की कीमत और वाहन की कुल लागत जैसे कारक इसकी स्वीकार्यता तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।