Madhya Pradesh Khade Hanuman Ji: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सरकार सड़क चौड़ीकरण को लेकर राह में आने वाले मकान और दुकानों पर लगातार बुलडोजर चलाने का काम कर रही है। ऐसे में सड़क के बीचों बीच आ रही हनुमान जी प्रतिमा को हटाने का प्रयास बीते कई दिनों से किया जा रहा है। प्रतिमा को हटाने के लिए कभी जेसीबी तो कभी बुलडोजर को बुलवाया गया। इतना ही नहीं कई बड़ी मशीने भी हनुमान जी की प्रतिमा के आगे धराशाही हो गई लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। प्रशासन द्वारा प्रतिमा को हटाने पर किए जा रहे काम को आज 48 घंटे बीत चुके हैं। लेकिन 20 फीट की प्रतिमा है कि वहां से एक इंच भी नहीं हिली। भक्त इसे बजरंगबली का चमत्कार मान रहे हैं। वहीं प्रशासन अब इस प्रतिमा को हटाने के काम में थक चुका है। इसके बाद अब इसकी जांच के लिए पुरातत्व विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम प्रतिमा की जांच कर रही है। क्योंकि प्रतिमा को अगर बलपूर्वक हटाने की कोशिश की गई तो वह खंडित या क्षतिग्रस्त भी हो सकती है। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन स्केनिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इस प्रतिमा के न हिलने के पीछे क्या कारण हैं।

8 फीट ऊंची बजरंगबली की प्रतिमा 1 इंच भी नहीं हिली

उज्जैन के सती गेट क्षेत्र में स्थित लगभग 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा इस समय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार सड़क चौड़ीकरण का काम कर रही है। तो वहीं दूसरी तरफ लोगों के उनके घर व दुकाने हाथ से चली गई है। लेकिन वहां मौजूद खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को कोई हिला नहीं पा रहा है। लोग इसे चमत्कार मानकर पूजा पाठ कर रहे हैं। 8 फीट ऊंची बजरंगबली की प्रतिमा का न हिलना स्थानीय लोगों की श्रद्धा का विषय है। भक्तों का मानना है कि जिनकी कृपा से एक पत्ता भी नहीं हिलता है उन्ही बजरंगबली को उनकी इच्छा के बगैर कोई कैसे हिला सकता है। ऐसे में मामला विकास कार्यों और धार्मिक धरोहर के बीच संतुलन का मुद्दा भी बन चुका है।

प्रशासन को स्थानीय लोगों ने दी चुनौती

कंठाला चौराहा से छत्री चौक तक उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन पूरी तरह से थक चुके हैं। 4 दिन बीत गए हैं। लेकिन प्रतिमा अपने स्थान पर जस की तस बनी हुई है। मंदिर के भवन और गर्भगृह को जेसीबी से तोड़ा जा चुका है। प्रतिमा के ऊपर अब कैनोपी टेंट लगाया गया है। स्थानीय लोगों ने मंदिर के बाहर चेतावनी भरा पोस्टर लगाया है। जिसमें प्रशसान को चुनौतीपूर्ण शब्दों का है कि अगर प्रतिमा को नुकसान पहुंचा या खंडित हुई तो इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

चमत्कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को चमत्कारी माना जा रहा है। दरअसल जिस समय मंदिर को हटाने का काम चल रहा था उस दौरान वहां करीब 50 से ज्यादा बंदर घरों की छतों पर पहुंचे और शांत होकर वहां चल रहे कौतूहल का नजारा देखने लगे। श्रद्धालु इस भावुक नजारे को एक टक देखते रहे। प्रतिमा के स्थानांतरण से पहले सभी श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रतिमा की जांच के लिए पहुंचे विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ रमण सोलंकी ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रतिमा मालवा के बेसाल्ट पत्थर से बनी है। परमार काल और राजा भोज के समय 1000 वर्ष पहले इस पत्थर पर प्रतिमा बनाने की परंपरा थी। प्रतिमा पर सिंदूर होने के कारण उनका मूल स्वरूप साफ नहीं हो पा रहा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों के जरिए इस प्रतिमा को सुरक्षित विस्थापित करना चाहिए।

एएसआई की सलाह व जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई

क्योंकि प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने का काम रोक कर इसकी जांच कराना शुरु करवा दिया है कि आखिर प्रितमा के एक इंच भी न हिलने के पीछे आखिर क्या वजह है? भारी क्रेन, जेसीबी व अन्य मशीने भी इस प्रतिमा को हटाने में फेल साबित रही। क्योंकि प्रतिमा को खंडित होने से भी बचाना है, ऐसे में अब प्रशासन ने जांच टीम को काम पर लगा दिया है। एएसआई की सलाह व जांच के बाद ही आगे की कोई कार्रवाई की जाएगी। लेकिन तब तक प्रतिमा के ऊपर टेंट लगाकर उसे सुरक्षित रखा गया है।

आस्था बनाम विकास

मंदिर के पुजारी महेश पंडित ने कहा कि, बाबा संकेत दे रहे हैं कि उन्हें इसी जगह रहना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक मंदिर साल 1857 की क्रांति से भी पहले का है। इसलिए इसे हटाने के बजाय इसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिे। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर प्रशासन सड़क चौड़ीकरण का काम कर रहा है। लेकिन आस्था, ऐतिहासिक विरासत और तकनीकी जटिलताएं इस काम में बड़ी रुकावट बन रहा है।


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