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महुआ मोइत्रा की बढ़ी मुश्किलें! नदिया कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की एक स्थानीय अदालत ने कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण के मामले में TMC की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की एक स्थानीय अदालत ने कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण के मामले में TMC की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। सहायक लोक अभियोजक शीर्षेंदु दास के मुताबिक, अदालत की ओर से सांसद को तीन बार समन भेजे गए थे, लेकिन वह निर्धारित तारीखों पर अदालत में पेश नहीं हुईं।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने 12 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, युवाओं और भारतीय सैनिकों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इन बयानों के विरोध में बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा प्रदर्शन किए जाने का भी दावा किया गया है।
3 बार समन के बावजूद पेशी नहीं
अभियोजक के अनुसार, इस मामले को लेकर 17 जून को कृष्णानगर CJM जिला एवं सत्र न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने महुआ मोइत्रा को पेश होने के लिए कई मौके दिए। उन्हें तीन बार समन भेजे गए, लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं हुईं।
18 जून को अदालत में पेश होने की अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी। हालांकि, उस दिन भी उनकी पेशी नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने 19 जून को उन्हें एक और विशेष अवसर देते हुए पेश होने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सांसद उस दिन भी अदालत में नहीं पहुंचीं। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायालय की तीसरी अदालत के जज दिब्येंदु दास ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। इस कार्रवाई के बाद मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया है।
फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का रुख
महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इसी महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। यह मामला एक कथित विवादित फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज FIR की जांच से संबंधित था। मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट से जांच अधिकारी के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी थी। उनका तर्क था कि यदि वह व्यक्तिगत रूप से जांच में शामिल होने के लिए जाती हैं, तो उनके साथ प्रदर्शन या विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है और उन पर अंडे फेंके जाने का खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने उनकी वर्चुअल पेशी की मांग को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान पीठ ने राजनीति में सक्रिय लोगों की सार्वजनिक जिम्मेदारियों को लेकर कड़ी मौखिक टिप्पणी की। जस्टिस दत्ता ने कहा कि राजनीति में आने वाले व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों का सामना करने से डरना नहीं चाहिए। पीठ ने स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए गोलियों तक का सामना किया था। इसके मुकाबले आज के नेताओं को अंडे फेंके जाने जैसी आशंकाओं के कारण जांच एजेंसी के सामने पेश होने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
कानूनी और राजनीतिक असर
महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होना उनके लिए एक नई कानूनी चुनौती है। हालांकि, गिरफ्तारी वारंट जारी होना अपने आप में आरोपों के दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान अदालत आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और सांसद की ओर से रखे जाने वाले पक्ष पर विचार करेगी।
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इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक भाषण, सार्वजनिक बयानबाजी और जनप्रतिनिधियों की कानूनी जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है। आने वाले दिनों में अदालत में महुआ मोइत्रा की पेशी और मामले की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
Written By: Geeta Sharma
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