भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हर साल देश में लगभग 80 हजार महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं, जो वैश्विक मामलों का करीब एक-तिहाई हिस्सा है। अब तक सर्वाइकल कैंसर से पहले की स्थिति यानी प्री-कैंसर स्टेज (CIN) के इलाज के लिए सर्जरी को सबसे प्रभावी विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की एक पहल ने इस क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है।
स्वदेशी एंटी-HPV दवा को मिला विकास का रास्ता
हाल ही में जारी एक एक रिपोर्ट के मुताबिक ICMR ने अपनी मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत तीन स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीकों को देश की प्रमुख फार्मा और वैक्सीन कंपनियों को लाइसेंस दिया है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा SHetA2 नाम की नई एंटी-HPV दवा की हो रही है। इस दवा को पुणे स्थित एमक्योर फार्मास्युटिकल्स को आगे के विकास के लिए सौंपा गया है। SHetA2 को खासतौर पर सर्वाइकल इंट्राएपिथेलियल नियोप्लासिया (CIN) के इलाज के उद्देश्य से विकसित किया गया है। CIN वह शुरुआती अवस्था है जिसमें कोशिकाओं में असामान्य बदलाव शुरू हो जाते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह सर्वाइकल कैंसर में बदल सकती है।
भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों की साझी रिसर्च
SHetA2 का विकास भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। इसे ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) के डॉ. शौकत हुसैन और अमेरिका की ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के स्टीफेंसन कैंसर सेंटर की डॉ. डोरिस एम. बेनब्रुक ने मिलकर तैयार किया है। इस दवा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लक्षित उपचार पद्धति है। यह HPV से प्रभावित प्री-कैंसर और कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर प्रभाव डालने की क्षमता रखती है, जबकि सामान्य स्वस्थ कोशिकाओं को कम से कम नुकसान पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। अगर आने वाले क्लिनिकल ट्रायल्स में SHetA2 सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो यह ऐसी शुरुआती टारगेटेड थेरेपी में शामिल हो सकती है जो सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज में सर्जरी के विकल्प के रूप में काम कर सके।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि सरकारी सहायता से होने वाली वैज्ञानिक खोजों को मरीजों तक पहुंचाने योग्य उत्पादों में बदलना जरूरी है। इसी उद्देश्य से मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र जैसी पहल शुरू की गई है, जो वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देती है। इस पहल से लैब में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है और देश में स्वदेशी मेडिकल इनोवेशन को बढ़ावा मिल सकता है।
इलाज में इस्तेमाल से पहले कई चरणों की परीक्षा जरूरी
हालांकि SHetA2 को लाइसेंस मिलना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह दवा तुरंत मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध हो जाएगी। किसी भी नई दवा की तरह इसे भी क्लिनिकल ट्रायल्स के विभिन्न चरणों से गुजरना होगा, जिसमें इसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और लंबे समय तक असर का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि SHetA2 सभी परीक्षणों में सफल रहती है, तो यह सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और इलाज के क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है। साथ ही, यह देश में विकसित होने वाली नई बायोमेडिकल तकनीकों के लिए भी एक मजबूत उदाहरण बन सकती है।
Written By Toshi Shah