Iran-US War: एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के करीब 7 महीने बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी तौर पर संघर्ष खत्म होने की घोषणा करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ इस विकल्प पर चर्चा की है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति इस कदम के पक्ष में हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका में Mid-term चुनाव नजदीक हैं और लंबे संघर्ष के चलते ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
युद्ध खत्म करने के संकेत, लेकिन सैन्य दबाव जारी
वहीं ऐसा ट्रंप का मानना है कि ईरान पर बढ़ता आर्थिक दबाव तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए मजबूर कर सकता है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने पिछले सप्ताह 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू किया, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों जैसे तेल, शिपिंग, एविएशन और डिजिटल एसेट्स पर दबाव बढ़ाना है। हालांकि, युद्ध खत्म करने की संभावित घोषणा के बीच अमेरिकी सैन्य गतिविधियां कम होने के बजाय बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
पेंटागन ने बढ़ाई पश्चिम एशिया में तैनाती
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी की अवधि चुपचाप बढ़ा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस फैसले का उद्देश्य राष्ट्रपति के सामने सैन्य विकल्प खुले रखना है। इससे यह संकेत मिलता है कि भले ही ट्रंप राजनीतिक स्तर पर युद्ध समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हों, लेकिन अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान लंबे संघर्ष की संभावना को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है।
ईरान में नए अमेरिकी हमले
यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को हुए हमलों के नए दौर के बाद सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया। वहीं हालिया अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत हुई और 142 लोग घायल हुए हैं।
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होर्मुज़ में 40 जहाजों को सुरक्षित निकाला गया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी सेना ने एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से 40 वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला। और जारी संघर्ष के दौरान एक ही अभियान में इतनी बड़ी संख्या में जहाजों को सुरक्षित निकालने का यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के करीब 60 सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस और रडार सिस्टम, समुद्री बुनियादी ढांचा, माइन बिछाने वाली सुविधाएं तथा संचार नेटवर्क शामिल बताए गए हैं।