राजस्थान के 3,309 नगर निकायों के 10,245 वार्डों में होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी मैदान में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की सक्रियता ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की राजनीतिक रणनीति को प्रभावित किया है। इसी कड़ी में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी राजस्थान में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचने वाले हैं। ओवैसी की चुनावी सभा 6 सितंबर को शाम 6 बजे जयपुर के शास्त्री नगर में प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल भी शामिल होंगे। दोनों नेताओं की मौजूदगी को आगामी निकाय चुनाव में AIMIM-RLP गठबंधन की ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

जाट-मुस्लिम समीकरण पर गठबंधन की नजर

AIMIM और हनुमान बेनीवाल की RLP इस बार निकाय चुनाव में साथ मिलकर मैदान में उतरी हैं। दोनों दलों के गठजोड़ को राजस्थान की सियासत में एक वैकल्पिक राजनीतिक धड़े के रूप में देखा जा रहा है। गठबंधन की रणनीति में जाट और मुस्लिम मतदाताओं को एक साथ जोड़ने पर खास जोर माना जा रहा है। इसी रणनीति के तहत 6 सितंबर को जयपुर में होने वाली सभा अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि ओवैसी और बेनीवाल इस मंच के जरिए गठबंधन के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच चुनावी जोश बढ़ाने के साथ-साथ अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश भी देंगे।

AIMIM सिर्फ सात सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

राजस्थान निकाय चुनाव में AIMIM ने सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी कुल सात सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतार रही है। ऐसे में राज्य स्तर पर कांग्रेस को AIMIM से बड़े पैमाने पर नुकसान होने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि, जयपुर का चुनावी गणित अलग नजर आ रहा है। राजधानी में बीजेपी ने इस बार आठ मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। ये सभी उम्मीदवार मुस्लिम बहुल इलाकों से चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी के इस कदम से कांग्रेस के सामने इन क्षेत्रों में मुकाबला और चुनौतीपूर्ण हो गई है।

चुनाव चिन्ह को लेकर हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

AIMIM को चुनाव से पहले राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच से झटका भी लगा है। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिन्ह 'पतंग' आवंटित किए जाने की मांग को लेकर अदालत का रुख किया था, लेकिन कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की। इस फैसले के बाद AIMIM के उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना होगा। पार्टी के सामने अब अपने उम्मीदवारों की पहचान और चुनाव चिन्ह को मतदाताओं तक पहुंचाने की अतिरिक्त चुनौती रहेगी। इसके बावजूद AIMIM ने चुनाव प्रचार से पीछे हटने के बजाय अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं। 6 सितंबर को जयपुर में ओवैसी और हनुमान बेनीवाल की संयुक्त मौजूदगी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RLP और AIMIM का गठबंधन जाट-मुस्लिम समीकरण को चुनावी समर्थन में बदल पाएगा। अगर दोनों दल अपने प्रभाव वाले इलाकों में मतदाताओं को साथ लाने में कामयाब होते हैं, तो निकाय चुनाव के नतीजों में कुछ सीटों पर मुकाबले का समीकरण जरूर बदल सकता है। हालांकि, गठबंधन का वास्तविक असर चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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