Strait of Hormuz: यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक टैंकर पर एक छोटी नाव से हमला किया गया। इस दौरान टैंकर के ढांचे पर दो विस्फोटक उपकरण लगाए गए, जिससे इंजन रूम में आग लग गई और जहाज कुछ समय के लिए बेकार हो गया।

UKMTO के अनुसार, यह घटना गुरुवार को लगभग 2212 UTC बजे, ओमान के खासब से लगभग 25 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई। जिसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए है कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बदलाव देखने को मिल रहा है।

ईरान ने दी खुली चेतावनी

ईरानी नौसेना अधिकारियों ने जहाजों को चेतावनी दी है कि वे बिना तालमेल के इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश न करें। उन्होंने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य उन जहाजों के लिए बंद है जो बिना किसी तालमेल के और अमेरिकी राष्ट्रपति के झूठ पर भरोसा करते हुए, प्रतिबंधित और असुरक्षित इलाकों से गुजरने की कोशिश करते हैं।"

ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी दोहराया है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा। IRIB के अनुसार, मेजर जनरल यजीदी ने कहा, "जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज इस्लाम के योद्धाओं के नियंत्रण में रहेगा और बंद रहेगा।"

कच्चे तेल की कीमतों में हुआ बड़ा उलटफेर

अमेरिका-ईरान टेंशन के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ताजा अपडेट के मुताबिक कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। जिसने कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो भारत समेत कई देशों पर एनर्जी संकट गहरा सकता है।

आखिर क्यों इतना महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल है।

इस समुद्री रास्ते से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन होता है।

युद्ध से पहले इस रास्ते से दुनिया की लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और LNG आपूर्ति गुजरती थी। यही वजह है कि यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में बाधा आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है।

अगर इस रास्ते पर लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो तेल की उपलब्धता, शिपिंग लागत और बीमा खर्च पर दबाव बढ़ सकता है।

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