Pakistan: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले रूकने का नाम नहीं ले रहा हैं। इसी बीच ईशनिंदा के आरोप के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ ने ईसाई व्यक्ति के घर और दवा की दुकान को जला दिया। हालांकि यह नया नहीं है, पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी है, जिसमे हिंदु, सिख, ईसाई परिवारों को बेघर कर दिया गया है।
अगर 1947 से 2026 तक की बात करें तो अल्पसंख्यकों की संख्या सिर्फ 2 प्रतिशत के आसपास रह गई है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी जरूरी अपडेट
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़े अत्याचार
ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान' (HRFP) ने पाकिस्तान के शेखूपुरा ज़िले के नारंग मंडी में ईसाई समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ भीड़ की हिंसा, आगज़नी और धमकियों की कड़ी निंदा की है। यह घटना कामरान गिल मसीह नाम के एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा के आरोप के बाद हुई। पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है।
HRFP की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी फैक्ट-फाइंडिंग टीम को जानकारी मिली कि कामरान गिल मसीह पर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ईशनिंदा वाली सामग्री शेयर करने का आरोप था। इस आरोप के बाद, उनके पारंपरिक मेडिकल क्लिनिक में आग लगा दी गई; यह क्लिनिक उनके घर से जुड़ा हुआ था और इसमें एक छोटी सी फ़ार्मेसी भी थी। हिंसा के डर से वहां पर रह रहे कई ईसाई परिवार भाग गए।
क्या है मामला?
जारी प्रेस रिलीज के अनुसार तनाव बढ़ने पर, स्थानीय निवासी रईस अहमद की शिकायत के बाद 9 अक्टूबर, 2026 को नारंग पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कामरान गिल मसीह ने एक वीडियो अपलोड और शेयर किया, जिसमें पैगंबर मुहम्मद और उनके परिवार के बारे में आपत्तिजनक सामग्री थी।
FIR में पाकिस्तान के दंड संहिता (Penal Code) की धारा 295-A, 298 और 298-A का ज़िक्र है, साथ ही उपलब्ध जानकारी के अनुसार 'मेंटेनेंस' कानून की धारा 16 के प्रावधानों का भी उल्लेख है।
अल्पसंख्यकों के लिए पाकिस्तान बना नर्क
पाकिस्तान में रह रहे हिंदु, सिख, ईसाई अल्पसंख्यकों को प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। अल्पसंख्यक महिलाओं व लड़कियों के अपहरण, ज़बरन धर्म-परिवर्तन, शादी का ख़तरा भी बना रहा है। 'द वॉयस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (VOPM) ने NCJP की 2026 की मानवाधिकार रिपोर्ट का ज़िक्र किया। पाकिस्तान पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले की खबरे लगातार आती रही है।