India Pakistan Water Dispute : पाकिस्तान ने UNHR में सिंधु जल संधि और पानी के अधिकार से जुड़ा मुद्दे को उठाया रोया है। पाकिस्तान ने इस बार भारत पर सामने से वार न करते हुए सिंधु जल के मुद्दे को बड़ा हथियार बनाया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में पाकिस्तान ने सिंधु जल के मुद्दे को शामिल कराते हुए इसे पानी पर अपना हक जमाने की बात रखी। भारत पर अभी सिंधु नदी का पानी देने के लिए किसी तरह की कानूनी बाध्यता नहीं है।
भारत ने अप्रैल महीने में साल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद साल 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। भारत सरकार ने साफ कर दिया कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म नहीं करता है, तब तक यह संधि बहाल नहीं होगी।
सिंधु जल को न बनाए राजनीतिक फायदे या युद्ध का जरिया
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत को चेतावनी दी है। इस बार पाकिस्तान ने भारत को घेरने के लिए सिंधु नदी के जल को अपना हथियार बनाया है। पाकिस्तान के फर्स्ट सेक्रेटरी अदील मुमताज खोखर ने जिनेवा में चल रहे 63वें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच पर भारत के खिलाफ अपना रोना रो दिया है।
पाकिस्तान ने सीधे तोर पर भारत को घरने का काम किया है। पाकिस्तान का कहना है किृ सिंधु नदी के जल को राजनीतिक फायदे या युद्ध का जरिया नहीं बनाना चाहिए। इसपर जर्मनी और स्पेन की तरफ से पेश किए सुरक्षित पेयजन और स्वच्छता के मानवाधिकार पर प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।
जहां पानी साझा होता है, वहां जिम्मेदारियां साझा होती हैं
पाकिस्तान के इस प्रस्ताव में आखिरी उल्लेख सीमा-पार जल सहयोग का किया गया जिक्र काफी सफल रहा था। पाकिस्तान ने भारत पर यह भी आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को इस मंच से हटाने की कोशिश कर रहा था। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उठाते हुए यह भी तर्क दिया कि साझा जल संधि के हिसाब से सीधे तौर पर सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के मानवाधिकारों से जुड़ा है।
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान खोखर ने पाकिस्तान के पक्ष में अपनी आवाज को बुलंद तरीके से मंच पर रखा। उन्होंने कहा, "जहां पानी साझा होता है। वहां जिम्मेदारियां भी साझा होती हैं। पड़ोसी देशों के बीच साझा जल संसाधनों पर सहयोग कोई अहसान या रियायत का नहीं, बल्कि साझेदारी का मुद्दा है।
पाकिस्तान ने क्या-क्या तर्क दिया?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में पाकिस्तान के फर्स्ट सेक्रेटरी अदील मुमताज खोखर ने तर्क देते हुए 2 देशों की 2 नदियों के जल की साझेदारी को अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पड़ोसियों की मदद करना कोई एहसान नहीं बल्कि मानवीय दायित्व होता हैा खोखर ने साफ करते हुए कहा कि भारत सिंधु नदी का पानी रोककर राजनीतिक प्रभाव के साथ दबाव नहीं बनाएगा।
पाकिस्तान प्रितिनिधि के तौर पर खोखर ने सिंधु नदी के जल को भारत द्वारा रोके जाने का सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कड़ी आलोचना की। खोखर ने कहा कि जबरन पानी को रोकने से देश अपना राजनीतिक फायदा कर रहा है और युद्ध की स्थिति को भी पैदा कर रहा है।
तो क्या अब भारत बुझाएगा पाकिस्तान की प्यास?
UNHRC में पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उठाकर अपनी स्वतंत्रता को प्रखर कर दिया है। जर्मनी और स्पेन की तरफ से पाकिस्तान के प्रस्ताव को सीमा-पार जल सहयोग के तहत मंजूरी दे दी गई है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को शामिल कराकर भारत की सीधे तौर पर अन्य देशों के सामने नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की है। अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत पर अन्य देशों के माध्यम से पाकिस्तान सिंधु नदी का जल भारत से हासिल कर पाएगा?
क्या पाकिस्तान इस मंच के जरिए राजनीतिक दबाव को भारत के खिलाफ अपना हथियार बना रहा है। पाकिस्तान ने भारत के सामने कई सवाल खड़े कर दिए है। जिसके बाद कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब सिंधु जल संधि को एक बार फिर पाकिस्तान के लिए खोलनी होगी।
पहलगाम हमले के बाद रोका था पानी
साल 2025 में 22 अप्रैल को कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 लोगों को अपना निशाना बनाया था। इसके जवाब में भारत सरकार ने 23 अप्रैल 2025 को अपनी कूटनीतिक के तहत 1960 से चली आ रही एतिहासिक सिंधु जल संधि पर रोक का ऐलान किया था।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने दुनिया के सामने पाकिस्तान की शर्मानक हरकत को जाहिर किया। भारत के साथ-साथ अन्य देशों ने भी पाकिस्तान की इस मामले को लेकर कड़ी निंदा की थी। लेकिन अब देखना यह होगा कि क्या भारत इसे लेकर कुछ नया करेगा। या फिर पाकिस्तान को पानी देगा?
यह भी पढ़ें: टीबी मुक्त अभियान को धार देंगे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, JOSH टीम का होगा राष्ट्रीय शुभारंभ