Jwala Missile: भारत अपनी सैन्य ताकत को लगातार बढ़ाने में लगा हुआ है, ताकि पाकिस्तान, चीन जैसे देशों से युद्ध के दौरान निपटा जा सके। भारत की बढ़ती देख पड़ोसी मुल्क का कलेजा बुरी तरह से जल रहा है। इसी बीच IG Defence ने अपनी स्वदेशी माइक्रो-मिसाइल 'ज्वाला' (JWALA) के दो सॉलिड रॉकेट मोटर्स का सफल परीक्षण किया है। 3 अक्टूबर 2026 को हुए इस परीक्षण को ड्रोन के खिलाफ भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी जानकारी।

क्या है भारत की स्वदेशी Jwala Missile?

बता दें कि ये आईजी डिफेंस के बड़े काउंटर-ड्रोन सिस्टम का हिस्सा होगी। कंपनी का लक्ष्य ऐसी मिसाइल तैयार करना है, जिसे अपेक्षाकृत कम लागत में बनाया जा सके और जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में तैनात किया जा सके। ज्वाला एक स्वदेशी, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली माइक्रो-मिसाइल प्रणाली है। इसे खास तौर पर दुश्मन के ड्रौन और अन्य खतरों को आसमान में ही नष्ट करने के लिए बनाया जा रहा है।

पाकिस्तान के लिए काल बनेगी ज्वाला मिसाइल

भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, हथियार या दूसरी प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने जैसी गतिविधियों के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकता है। ऐसे में ज्वाला जैसी कम दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल भविष्य में भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती है। याद हो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक ने बड़ी संख्या में ड्रोन से हमला किया था जिसे भारत के एयर डिफेंस ने बुरी तरह से नाकाम कर दिया था। वहीं अब ज्वाला मिसाइल आने के बाद ऐसे ड्रोन को आसमान में ही नष्ट किया जा सकेगा।

क्या है मिसाइल की खासियत

सबसे खास बात है कि इसकी लागत कम है, इसे बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है। इसकी निर्धारित लक्ष्य सीमा 2 से 5 किलोमीटर रह सकती है। इस ज्वाला मिसाइल की ऊंचाई सीमा 50 मीटर से 5 किलोमीटर के बीच हो सकती है। ज्वाला को अकेले काम करने वाली मिसाइल के बजाय एक व्यापक रक्षा नेटवर्क का हिस्सा बनाने की योजना है। इस नेटवर्क में सेंसर, कमांड सिस्टम और इंटरसेप्टर एक-दूसरे के साथ काम करेंगे। माना जा रहा है कि यह मिसाइल दुश्मनों पर काल बनकर टूटेगा।