कोलंबो (श्रीलंका): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) मेमोरियल पर पहुंचकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें श्रीलंकाई सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उन्होंने उन वीर जवानों को नमन किया, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए वे प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

IPKF मिशन को किया याद

इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) को 1987 में भारत-श्रीलंका समझौते के तहत श्रीलंका भेजा गया था। इसका उद्देश्य लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) को हथियार छोड़ने के लिए तैयार करना और विशेष रूप से जाफना प्रायद्वीप में शांति बहाल करने में मदद करना था।

IPKF ने श्रीलंका में कठिन उग्रवाद विरोधी अभियानों का सामना किया और मार्च 1990 में वहां से वापस लौटी।

भारत-श्रीलंका रक्षा और समुद्री सहयोग पर जोर

राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय श्रीलंका यात्रा के दौरान रक्षा और समुद्री सहयोग प्रमुख मुद्दे रहे। इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत और श्रीलंका के बंदरगाह दोनों देशों के लिए साझा आर्थिक विकास के इंजन बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास को मजबूत कर सकती है।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति से हुई मुलाकात

राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार हैं। दोनों देशों ने विकास, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

मुश्किल समय में श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा भारत

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा मुश्किल समय में श्रीलंका का पहला सहयोगी रहा है और आगे भी उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

उन्होंने पिछले साल चक्रवात दितवाह के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ का भी जिक्र किया, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों और श्रीलंकाई एजेंसियों ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग किया था।

ETCA और आर्थिक सहयोग पर चर्चा

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत श्रीलंका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों और निवेशकों में शामिल है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई। उन्होंने आर्थिक और तकनीकी सहयोग समझौते (ETCA) पर जल्द आगे बढ़ने की बात भी कही।

40 साल बाद ऐतिहासिक रक्षा यात्रा

राजनाथ सिंह की यह यात्रा एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। वह करीब 40 वर्षों बाद श्रीलंका का आधिकारिक रक्षा दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री बने हैं। इससे पहले 1988 में तत्कालीन रक्षा मंत्री केसी पंत ने श्रीलंका का दौरा किया था।

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