बलूचिस्तान (पाकिस्तान): पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) के मामलों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दो और लोगों के लापता होने के मामले सामने आए हैं, जबकि पहले से लापता बताए जा रहे पांच लोग अपने घर लौट आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बलूचिस्तान पोस्ट ने दावा किया है कि कई परिवारों को अब भी अपने परिजनों की स्थिति और ठिकाने की जानकारी नहीं मिल पाई है।
दो लोगों के लापता होने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, अली बलोच, जो अब्दुल हई के बेटे हैं, को कथित तौर पर 23 अगस्त को तड़के करीब 3 बजे मस्तुंग इलाके से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं है।
वहीं, दूसरे मामले में शकील बलोच के परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें 16 अप्रैल की रात क्वेटा के किली गोहराबाद स्थित उनके घर से ले जाया गया। परिवार ने इस घटना में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) से जुड़े कर्मियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
दोनों परिवारों का कहना है कि उन्हें अब तक अपने रिश्तेदारों की स्थिति या ठिकाने की कोई जानकारी नहीं दी गई है।
पांच लापता लोग लौटे घर
रिपोर्ट के अनुसार, पहले लापता बताए गए पांच लोग वापस अपने घर पहुंच गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- सऊद बशीर — कथित तौर पर 4 सितंबर को बुलेदा के अलंदूर से लापता हुए और अगले दिन लौटे।
- सद्दाम बुगती — डेरा बुगती के मेन टाउन से 29 अगस्त को लापता बताए गए और 3 सितंबर को वापस आए।
- जुबैर अहमद — हब चौकी से 30 जुलाई को लापता हुए और 2 सितंबर को घर लौटे।
- इमदाद शाहवानी — क्वेटा से 30 अगस्त को कथित तौर पर गायब हुए और 3 सितंबर को लौटे।
- जहांजेब बलोच — पंजगुर से 9 जुलाई को लापता बताए गए और 2 सितंबर को वापस आए।
रिपोर्टिंग में देरी को लेकर भी सवाल
स्थानीय सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान में कई गुमशुदगी के मामले घटना के कई हफ्तों या महीनों बाद सामने आते हैं।
इसके पीछे परिवारों पर कथित दबाव, डर और शिकायत दर्ज कराने में आने वाली परेशानियों को कारण बताया गया है।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के मामलों को लेकर मानवाधिकार समूह लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। उनका कहना है कि लापता लोगों के परिवारों को जानकारी और न्याय मिलना जरूरी है।
वहीं, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करती रही हैं और अपनी कार्रवाइयों को सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा बताती हैं।