नई दिल्ली: देश के माल ढुलाई नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव पूरा हो गया है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का करीब 2,843 किलोमीटर लंबा पूरा नेटवर्क अब ऑपरेशनल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के आखिरी अहम सेक्शन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से दादरी तक मालगाड़ियों के लिए सीधा फ्रेट रूट उपलब्ध हो गया है।

करीब 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने लगभग 326 किलोमीटर के आखिरी तीन सेक्शन के शुरू होने के बाद 1,506 किलोमीटर लंबा WDFC पूरी तरह चालू हो गया है। इससे पश्चिमी तट के प्रमुख बंदरगाहों से दिल्ली और उत्तर भारत तक माल की आवाजाही को गति मिलने की उम्मीद है।

JNPT से दादरी तक सीधी कनेक्टिविटी
WDFC नवी मुंबई के JNPT से दिल्ली के पास दादरी तक फैला है। न्यू साणंद-न्यू मकरपुरा, न्यू उम्बरगांव-न्यू सफले और न्यू सफले-JNPT सेक्शन के शुरू होने के साथ पूरा कॉरिडोर ऑपरेशनल हो गया है। इससे JNPT के अलावा मुंबई पोर्ट, पिपावाव, मुंद्रा और कांडला जैसे प्रमुख बंदरगाहों से आने-जाने वाले माल को उत्तर भारत के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

नमक से कोयला और सीमेंट तक की तेज ढुलाई
DFC पर ISO कंटेनरों के साथ-साथ फर्टिलाइजर, खाद्यान्न, नमक, कोयला, लौह अयस्क, स्टील और सीमेंट जैसे सामान की ढुलाई भी होती है। कंटेनर दादरी, तुगलकाबाद, ढंडारी कलां और खाटूवास जैसे इनलैंड कंटेनर डिपो तक पहुंचाए जाते हैं। अलग फ्रेट रूट मिलने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के साथ उसी ट्रैक पर चलने की मजबूरी कम होगी। इससे ट्रांजिट टाइम घटाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

रोज चल रही हैं 426 से ज्यादा फ्रेट ट्रेनें
DFC नेटवर्क पर मालगाड़ियों की रफ्तार में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दोनों कॉरिडोर पर रोजाना 426 से ज्यादा फ्रेट ट्रेनें चल रही हैं। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक DFC पर मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रही है। WDFC पर अप्रैल और मई में औसत रफ्तार क्रमशः 53.6 और 52.3 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि EDFC पर यह 44.9 और 44.7 किलोमीटर प्रति घंटा रही।

EDFC ने कई बड़े शहरों को किया बायपास
देश का दूसरा प्रमुख फ्रेट नेटवर्क ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) है। करीब 1,337 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक फैला है। इसका बड़ा हिस्सा पूर्वी भारत के कोयला और खनिज परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। EDFC की खासियत यह है कि यह कई घनी आबादी वाले शहरों को बायपास करता है। इनमें मिर्जापुर, प्रयागराज, कानपुर, इटावा, फिरोजाबाद, टूंडला, हाथरस, अलीगढ़, हापुड़ और मेरठ समेत कई क्षेत्र शामिल हैं।

रेलवे की माल ढुलाई बढ़ाने में मिलेगी मदद
देश में कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 27 फीसदी है। नेशनल रेल प्लान के तहत 2030 तक इसे बढ़ाकर 45 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,670 मिलियन टन की रिकॉर्ड माल लोडिंग दर्ज की थी। DFC के पूरा होने से बंदरगाहों, कंटेनर टर्मिनलों और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे सप्लाई चेन बेहतर होने और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है।

2005 में शुरू हुई थी परियोजना की कहानी
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना पर भारत और जापान के बीच अप्रैल 2005 में गंभीर चर्चा हुई थी। अक्टूबर 2007 में फिजिबिलिटी स्टडी के बाद Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited (DFCCIL) का गठन किया गया।

मार्च 2014 तक परियोजना पर करीब 10,357 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद एक भी किलोमीटर कमीशन नहीं हुआ था। इसके बाद निर्माण की गति तेज हुई। जनवरी 2023 तक 1,724 किलोमीटर DFC कमीशन हो चुका था और दिसंबर 2023 में 1,337 किलोमीटर लंबा EDFC पूरा हो गया। अब सितंबर 2026 में WDFC के आखिरी 326 किलोमीटर के सेक्शन शुरू होने के साथ पूरा 2,843 किलोमीटर का DFC नेटवर्क ऑपरेशनल हो गया है।

अब डानकुनी-सूरत कॉरिडोर की तैयारी
दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर के बाद अब देश में तीसरे बड़े DFC की तैयारी शुरू हो गई है। बजट में पश्चिम बंगाल के डानकुनी से गुजरात के सूरत तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना सामने आई है। इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यानी आने वाले वर्षों में फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क और बड़ा होने वाला है। तेज मालगाड़ियां, कम ट्रांजिट टाइम और बेहतर पोर्ट कनेक्टिविटी ये बदलाव देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।