जिनेवा (स्विट्जरलैंड): संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क (Volker Türk) ने भारत में हालिया छात्र प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की सराहना की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ संवाद करना किसी भी सरकार के लिए बल प्रयोग से ज्यादा प्रभावी तरीका है।

जिनेवा में 7 सितंबर को दिए अपने संबोधन में तुर्क ने कहा कि भारत में हुए हालिया छात्र प्रदर्शनों में सरकार की ओर से युवाओं के नेताओं के साथ बातचीत करना एक सकारात्मक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुंच जैसे अधिकार लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच भरोसा मजबूत करते हैं।

भारत के संवाद आधारित रवैये की तारीफ

वोल्कर तुर्क ने कहा कि सरकारों को जनता की नाराजगी और मांगों को समझने के लिए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र में बदलाव और बातचीत का माध्यम बन सकते हैं।

उन्होंने भारत को उन देशों के मुकाबले एक अलग उदाहरण के रूप में पेश किया, जहां विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बल प्रयोग और दमन का सहारा लिया गया।

पाकिस्तान में कार्रवाई पर चिंता

UN मानवाधिकार प्रमुख ने पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग और मनमानी गिरफ्तारियों को लेकर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि कुछ देशों में सरकारें नागरिक विरोध को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही हैं, जिससे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर असर पड़ रहा है।

चीन के शिनजियांग और तिब्बत मुद्दे पर सवाल

वोल्कर तुर्क ने चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में मानवाधिकार स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चीनी अधिकारियों से राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कानूनों की समीक्षा करने, अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा मजबूत करने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच करने की अपील की।

उन्होंने तिब्बती लोगों के धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई और नीतियों में बदलाव की मांग की।

कई अन्य देशों में नागरिक अधिकारों पर चिंता

UN मानवाधिकार प्रमुख ने ईरान में बढ़ते दमन और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बढ़ती फांसी की घटनाओं का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने निकारागुआ में विपक्षी दलों पर प्रतिबंध, रूस में राजनीतिक विरोध पर कार्रवाई और अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया व युगांडा जैसे देशों में नागरिक स्वतंत्रताओं और मीडिया की आजादी पर बढ़ती पाबंदियों का मुद्दा उठाया।

UNHRC में भारत की छवि को लेकर चर्चा

वोल्कर तुर्क के बयान में भारत को संवाद और शांतिपूर्ण समाधान के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया, जबकि कई अन्य देशों में विरोध प्रदर्शनों के प्रति कठोर रवैये पर सवाल उठाए गए।

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन जनता की नाराजगी और सरकार के बीच संवाद का पुल बन सकते हैं और इससे लोगों की आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

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