बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किर्गिस्तान यात्रा से पहले भारत के राजदूत बीरेंद्र सिंह यादव ने दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा, सुरक्षा और व्यापारिक संबंधों को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग अब एक व्यवस्थित ढांचे में आगे बढ़ रहा है।

रक्षा सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह

बिश्केक में मीडिया से बातचीत करते हुए भारतीय राजदूत ने बताया कि रक्षा सहयोग के लिए संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के गठन को लेकर हुए समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों को संस्थागत रूप मिला है।

उन्होंने कहा, "रक्षा और सुरक्षा सहयोग ने एक संरचित प्रारूप ले लिया है। संयुक्त कार्य समूह नियमित रूप से बैठक करता है और वार्षिक कार्य योजना तैयार करता है। सभी गतिविधियां इसी तय ढांचे के अनुसार संचालित की जाती हैं।"

द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए व्यवस्था

राजदूत यादव ने बताया कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए भी व्यवस्था बनाई गई है। इसके अलावा किर्गिस्तान की जरूरतों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और सैन्य-तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर

भारत-किर्गिस्तान के बीच सीधी भौगोलिक कनेक्टिविटी की चुनौती पर उन्होंने कहा कि दोनों देश इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का उपयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इससे भारत, किर्गिस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापार और माल परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि INSTC कॉरिडोर का बेहतर इस्तेमाल दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर मोदी

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो देशों की यात्रा के बीच सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रवाना हुए हैं। इस दौरान वह किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सद्यर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक में होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा से पहले कहा कि भारत SCO का 2017 से सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाना है।

मध्य एशिया और भारत की रणनीतिक साझेदारी

उन्होंने कहा कि यह यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगी और शांति, स्थिरता व समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाएगी।

बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में 10 सदस्य देश शामिल हैं। इसका क्षेत्रफल करीब 3.6 करोड़ वर्ग किलोमीटर है और इसमें दुनिया की लगभग 3.4 अरब आबादी शामिल है। भारत को 2017 में इस संगठन की पूर्ण सदस्यता मिली थी।

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