Hindu Firsrt Mandir BAPS In Paris: पेरिस में भव्य BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के लोकार्पण समारोह में पीएम मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें पीएम मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि, मंदिर भारत-फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का ‘नया युगस्तंभ’ है। BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का जीवंत मंच बन गया है। उन्होंने कहा कि भले ही वे पेरिस में उपस्थित नहीं हैं, लेकिन मन और हृदय से स्वयं को सभी के बीच अनुभव कर रहे हैं। पीएम ने कहा- स्वामीनारायण मंदिर ने भारत-फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ा है; यह 'मेड इन इंडिया, बिल्ट इन फ्रांस' है, जो सहयोग और सेवा का प्रतीक है।

भारतीय वास्तुकला के साथ-साथ वैदिक शिल्पशास्त्र का रखा ध्यान


आज सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ BAPS अक्षरधाम संस्थान से जुड़ा है। वर्तमान गुरु परम महंतस्वामी महाराज के प्रोत्साहन से ही यह कार्य आज पूरा हो पाया है। इस मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला के साथ-साथ वैदिक शिल्पशास्त्र को ध्यान में रखते हुए किया है। इसमें फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक की सुंदर झलक देखने को मिलती है। तकरीबन 13 दिनों तक इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर महोत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें भारत, अफ्रीका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाड़ा, और इंग्लैंड समेत 40 से भी ज्यादा देश शामिल हुए।

कई देवी देवताओं की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा

इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पूरे विधि विधान के साथ महापूजा की कई। जो अक्षरपुरुषोत्तम महाराज श्री घनश्याम महाराज, श्री पार्वती-शंकर भगवान संग श्री कार्तिकेय जी एवं श्री गणेश जी महाराज, श्री राधा-कृष्ण भगवान, श्री सीता-राम भगवान संग लक्ष्मण जी और हनुमान जी महाराज, श्री पद्मावती वेंकटेश्वर भगवान, श्री अय्यप्पा स्वामी जी, श्री नीलकंठवर्णी महाराज (भगवान स्वामिनारायण का स्वररूप) और गुरु परंपरा की मूर्तियों को पूरे विधि विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा किया गया। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने सभी धर्मों के बीच आपसी प्रेम सद्भावना व सौहार्द रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और सभी का कल्याण हो मंदिर में हम प्रथम प्रार्थना यही करेंगे।

सुंदर ढंग से श्रृंगार की गई मूर्तियों को रथ पर सजाया

प्रतिष्ठा विधि से पहले पूर्व पेरिस शहर में एक भव्य नगर यात्रा आयोजित की गई। इसमें संगीत, कला और भक्तिमय प्रस्तुतियां दी गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे धजे कलाकारों के साथ 14 सुसज्जित रथों को शामिल किया गया। सुंदर ढंग से श्रृंगार की गई मूर्तियों को रथ पर सजाया गया। विश्वविख्यात एफिल टावर व एकोल मिलिटेर होते हुए यह यात्रा प्लास द ला कॉनकॉर्ड पहुंची। इसके जरिए फ्रांस के लोंगो में अध्यात्मिक व सौहार्द की भावना को जगाने का काम किया गया।

गुरु योगीजी महाराज का संकल्प हुआ पूरा

गुरु योगीजी महाराज ने साल 1970 में पेरिस में भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था। इसके बाद विश्ववंदनीय प्रमुक स्वामी महाराज ने अपनी अध्यात्मिक विदेशी यात्रा के दौरान यहां कई बार पुष्पवर्षा की गई और अपने गुरु के संकल्प को आधार देते हुए फ्रांस में सत्संग की नीव रखी. साल 2021 में वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में मंदिर की जमीन का पूजन हुआ। साल 2022 में शिलान्यास विधि संपन्न हुई। साल 2026 में मंदिर का निर्माण काम पूरा हो गया।

संगमंगमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर से बनाया गया मंदिर

5000 वर्गमीटर के क्षेत्र में यह मंदिर फैला है। इसके ऊपरी तल में मंदिर और आधार में सांस्कृतिक केंद्र के साथ- साथ सुंदर हवेली भी है। इसके निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम जैसे देशों से प्राप्त संगमंगमर तथा ग्वालियर के बलुआ पत्थर का उपयोग बना है। इसमें 5 शिखर, 10 विशाल गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियांम है। मंदिर परिसर में कक्षाएं, प्रदर्शनी स्थल कार्यालय और सभागृह भी मौजूद है।

फांस की धरती पर हिंदू परंपरा

फ्रांस की धरती पर बना यह पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है। जो विश्वभर के लोगों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का एक अहम जरिया बनेगा। इसके साथ ही वहां रहने वाले भारतीय लोगों के लिए उपासना का भी केंद्र बनेगा। मंदिर प्रेम, सौहार्द का जीवंत उदाहरण भी है। यह विश्व कल्याण के संदेश के साथ सभी को भक्ति की प्रेरणा देगा।

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