ढाका: बांग्लादेश हाई कोर्ट ने रविवार को हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को दो और मामलों में जमानत दे दी है। इसके साथ ही अब उन्हें कुल चार मामलों में जमानत मिल चुकी है।
चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपुर्ब कुमार भट्टाचार्य ने मीडिया को बताया कि हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जाहिद सरवर और न्यायमूर्ति शेख अबू ताहेर शामिल थे, ने जमानत का आदेश जारी किया।
वकील ने बताया कि इन मामलों में हत्या के प्रयास, तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराएं शामिल थीं। इससे पहले 2 अगस्त को दो मामलों में जमानत मिली थी, जबकि रविवार को दो और मामलों में राहत मिलने के बाद कुल चार मामलों में जमानत हो गई है।
चिन्मय कृष्ण दास पर राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप
चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का आरोप लगाया गया था।
उनकी गिरफ्तारी के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। 27 नवंबर को चटगांव कोर्ट परिसर के बाहर उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें एक वकील की मौत हो गई थी।
हालांकि, चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ अभी भी दो मामले लंबित हैं, जिनमें उन्हें जमानत नहीं मिली है। उनके वकील के अनुसार, इनमें से एक मामला राजद्रोह से जुड़ा है, जबकि दूसरा चटगांव में दर्ज हत्या का मामला है।
वकील ने कहा कि जब तक इन दोनों मामलों में भी जमानत नहीं मिलती, तब तक चिन्मय कृष्ण दास जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के अधिकारों को लेकर मुखर
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के अधिकारों को लेकर मुखर रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अलग कानून, अल्पसंख्यक उत्पीड़न से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई के लिए विशेष ट्रिब्यूनल और अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग की है।
इससे पहले अगस्त में उनकी कानूनी टीम ने उनकी रिहाई की प्रक्रिया धीमी होने पर चिंता जताई थी और आरोप लगाया था कि उनकी रिहाई में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है।
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