Guyana: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अक्सर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव का असर देखने को मिलता है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए देशों से तेल खरीदने की रणनीति पर काम कर रहा है। याद हो कि अमेरिका-ईरान युद्ध में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

इसी कड़ी में दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना भारत के लिए एक अहम तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है। दोनों देशों के बीच कच्चे तेल के कारोबार को बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। चलिए आपको बताते है भारत को इससे क्या फायदा हो सकता है?

भारत के लिए क्यों अहम है गुयाना?

गुयाना दक्षिण अमेरिका का एक छोटा देश है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां तेल उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। समुद्र के भीतर मिले बड़े तेल भंडार ने इस देश को वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण पहचान दिलाई है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देशों में शामिल है। मालूम हो कि पीएम मोदी 19 से 21 नवंबर 2024 तक गुयाना की राजकीय यात्रा पर गए थे। पूरे 56 साल बाद कोई पीएम इस देश में गया था। अब भारत में गुयाना के उच्चायुक्त धर्मकुमार सीराज अहम जानकारी दी है। जिससे भारत को जबरदस्त फायदा हो सकता है।

क्या बोले गुयाना के उच्चायुक्त धर्मकुमार सीराज?

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए गुयाना के उच्चायुक्त धर्मकुमार सीराज ने कहा, "हमारे पास दुनिया का सबसे बेहतरीन कच्चा तेल (क्रूड) है। अभी हमारे पास लगभग 12 बिलियन बैरल का प्रमाणित भंडार है। हम भारत के लिए एक रणनीतिक साझेदार बन सकते हैं। भारत के पास रिफाइनरी और खपत की क्षमता है। मुझे लगता है कि भारत में रोज़ाना लगभग 5 मिलियन बैरल की खपत होती है।

भविष्य में हम इसका लगभग 20% हिस्सा सप्लाई कर सकते हैं। भारत में सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। मुझे लगता है कि हमें रिफाइनरी लगाने पर विचार करना चाहिए, ताकि हम कच्चे तेल को प्रोसेस करके तैयार उत्पाद बेच सकें।

 

हमारे राष्ट्रपति ने हाल ही में गुयाना को समुद्री और इकोसिस्टम के लिए एक 'रीफ्यूलिंग हब' (ईंधन भरने का केंद्र) बनाने के बारे में बात की थी। मुझे लगता है कि यह एक शानदार विचार है। हम अटलांटिक महासागर में गहरे पानी वाले चैनल में एक सुविधा केंद्र बना सकते हैं।

भारत के पास अनुभव और बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता है। भारत, गुयाना के साथ मिलकर बहुत कुछ कर सकता है।" भारत के लिए ये बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।