फ्रैंकफर्ट: जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत को अलग देश बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिंध प्रांत पाकिस्तान के “औपनिवेशिक कब्जे” में है।
सिंधी राष्ट्रवादी संगठनों से राजनीतिक एकता मजबूत करने की अपील करते हुए उन्होंने सिंध की “पूर्ण राष्ट्रीय और बौद्धिक मुक्ति” की मांग दोहराई। गौरतलब है कि सिंध प्रांत को अलग करने की मांग लंबे समय से चल रही है।
एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में बुरफत ने कहा कि सिंध की जमीन, पानी, प्राकृतिक संसाधनों, राजनीतिक स्वायत्तता, राष्ट्रीय पहचान और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दे सामूहिक हैं और इनके लिए एकजुट राजनीतिक प्रतिक्रिया जरूरी है।
उन्होंने कराची में सिंध यूनाइटेड पार्टी (SUP) द्वारा सैयद जैन शाह के नेतृत्व में आयोजित ‘वहदत-ए-सिंध’ रैली की सराहना की। बुरफत के अनुसार, इस रैली ने सिंध की भौगोलिक एकता और जनता के अधिकारों के समर्थन में राजनीतिक अभिव्यक्ति का रूप लिया।
राजनीतिक आंदोलन को मजबूत करने की अपील
JSMM प्रमुख ने कहा कि सिंध समर्थक राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच मतभेद होने के बावजूद प्रांत की जमीन, नदियों, संसाधनों और राजनीतिक भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सहयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापक सहयोग से राजनीतिक आंदोलन को मजबूत किया जा सकता है और विभाजन की स्थिति को रोका जा सकता है।
दीर्घकालिक राजनीतिक अभियान
बुरफत ने जमीनी स्तर पर लंबे समय तक राजनीतिक लामबंदी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने गांवों, कस्बों, शिक्षण संस्थानों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, बुद्धिजीवियों और विदेशों में रह रहे सिंधियों को एक दीर्घकालिक राजनीतिक अभियान से जोड़ने की अपील की।
उन्होंने राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि किसी परियोजना का रुकना, एक विरोध प्रदर्शन या कोई अस्थायी राजनीतिक उपलब्धि अंतिम जीत नहीं मानी जानी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे घटनाक्रम व्यापक राजनीतिक लक्ष्य की दिशा में केवल एक चरण हैं।
सिंध के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार
बुरफत ने कहा कि सिंध के लोगों को आत्मनिर्णय, जनसहमति और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर स्वतंत्र राजनीतिक संघर्ष करने का अधिकार है। उन्होंने एक स्वतंत्र ‘सिंधुदेश’ की स्थापना के समर्थन को भी दोहराया और आरोप लगाया कि सिंध के संसाधनों, नदियों, जमीन तथा तटीय क्षेत्रों पर पाकिस्तान की सरकार और सेना का नियंत्रण है। उन्होंने विदेशों में रह रहे सिंधी समुदाय से भी अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंध के इस कथित “औपनिवेशिक संघर्ष” को उठाएं।
सिंध में लंबे समय से चल रहा है आंदोलन
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। जोसिंध क्षेत्र में सिंधुदेश नामक एक जातीय राष्ट्रवादी संप्रभु राज्य की स्थापना करके सिंधी लोगों के लिए एक देश बनाने की वकालत करता है।
सिंधुदेश की मांग करने वाले जीएम सैयद
बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी मिलने के बाद सिंध प्रांत में अलगाववादी ज्यादा सक्रिय हो गये।सिंधी राष्ट्रवादी नेता जी.एम. सैयद ने 1972 में इस आंदोलन की स्थापना की। पाकिस्तान के संस्थापकों में से एक सैयद ने बंगाली राष्ट्रवाद से प्रभावित होकर जेय सिंध महाज़ (जेएसएम) की स्थापना की और सिंधी पहचान और भाषा को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाए।
1995 में सैयद की मृत्यु के बाद आंदोलन काफी कमजोर पड़ गया। उनके बाद कार्यकर्ता बशीर खान कुरैशी जेएसएम के अध्यक्ष बने। जेय सिंध मुत्तहिदा महाज़ (जेएसएमएम) की स्थापना 2000 में काबुल स्थित कार्यकर्ता शफी मोहम्मद बुरफत ने की।
यह भी पढ़ें: बाढ़ तबाही के बाद नेपाल का चीन पर आरोप, कहा- नहीं दी ग्लेशियर की...