Bangladesh: तारिक रहमान सरकार में कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। देश के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मोहम्मद अली हुसैन फकीर ने कहा कि अगर सरकार अनुमति देती है, तो जहां ‘क्रॉसफायर’ जरूरी होगा, वहां पुलिस ऐसा करेगी।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक दलों, मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार संगठनों ने सवाल उठाए। क्रॉसफायर को आसान भाषा में समझे तो पुलिस चाहे तो किसी भी अपराधी पर सीधे गोली चल सकती है। इस बयान के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

बांग्लादेश में आईजीपी के बयान से मची हलचल

बताते चले कि बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान की मां बेगम खालिदा जिया जब प्रधानमंत्री थी उस वक्त 'क्रॉसफायर' को लागू किया गया था। इसके तहत कानून कायम करने के लिए बदमाशों को गोली मारने वाला कानून लागू किया गया था।

आरोप लगे कि बेगम खालिदा जिया के शासनकाल में इस कानून के तहत भारी संख्या में राजनीतिक विरोधियों का सफाया कर दिया गया। वहीं अब इसे लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई है। इसी को लेकर बांग्लादेश अवामी लीग ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

बांग्लादेश अवामी लीग ने जताई नाराजगी

बांग्लादेश आवामी लीग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, बांग्लादेश अवामी लीग, पुलिस महानिरीक्षक (IGP) मो. अली हुसैन फकीर द्वारा 'क्रॉसफायर' (मुठभेड़ में हत्या) को लेकर दिए गए कथित बयानों की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने संकेत दिया था कि अगर सरकार अनुमति दे, तो पुलिस ऐसे कदम उठा सकती है। देश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी का इस तरह का बयान मानवाधिकारों, संवैधानिक सुरक्षा और कानून के शासन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।

सरकार की कोई भी अनुमति 'न्यायेतर हत्या' (extrajudicial killing) को वैध नहीं बना सकती। हर नागरिक को जीवन का अधिकार, उचित कानूनी प्रक्रिया और कानून के समक्ष समान सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे उसकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो या उस पर कोई भी आरोप लगा हो।

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