11 सितंबर 2001 के अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर आए सऊदी नागरिक उमर अल-बायूमी को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। मीडिया एजेंसी की जांच में ऐसे वीडियो मिले हैं, जिनमें अल-बायूमी को अल-कायदा के भविष्य के नेता रहे अनवर अल-अवलाकी के साथ देखा जा सकता है। इन वीडियो के सामने आने के बाद 9/11 हमलों से जुड़े कई पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। मीडिया एजेंसी की          पैनोरमा और रेडियो 4 की जांच के मुताबिक, ये वीडियो अमेरिकी जांच एजेंसियों ने हमलों के बाद सबूत के तौर पर जुटाए थे, लेकिन इन्हें लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया गया। यह मामला 9/11 पीड़ित परिवारों की ओर से दायर उस बड़े मुकदमे से भी जुड़ा है, जिसमें सऊदी अरब की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

पेंटबॉल ट्रेनिंग में साथ नजर आए बायूमी और अवलाकी

जांच में सामने आए एक वीडियो को 1997 या 1998 की शुरुआत का बताया जा रहा है। इसमें उमर अल-बायूमी और अनवर अल-अवलाकी अमेरिका के सैन डिएगो के पास एक पेंटबॉल अभ्यास में हिस्सा लेते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उनके साथ सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मौजूद होने की बात भी कही गई है। वीडियो में कुछ लोग सैन्य अंदाज के कपड़े पहने नजर आते हैं और शहरी इलाकों में लड़ाई जैसे अभ्यास करते दिखाई देते हैं। जांचकर्ताओं को बाद में बताया गया था कि कुछ पेंटबॉल गतिविधियों का इस्तेमाल चरमपंथी प्रशिक्षण के लिए किया जाता था। उस समय तक अनवर अल-अवलाकी के अल-कायदा से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में होने की जानकारी सामने आ चुकी थी। साल 2011 में अमेरिकी ड्रोन हमले में उसकी मौत हो गई थी।

दूसरे वीडियो में अवलाकी को गले लगाते दिखे बायूमी

एक अन्य वीडियो जनवरी 1998 का बताया जा रहा है, जिसमें उमर अल-बायूमी और अनवर अल-अवलाकी एक-दूसरे को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि 9/11 पीड़ित परिवारों के मुकदमे में 2021 में हुई पूछताछ के दौरान बायूमी ने अवलाकी से मुलाकात से इनकार किया था। नया वीडियो उसके इस दावे पर सवाल खड़े करता है।

1994 में अमेरिका पहुंचा था बायूमी

उमर अल-बायूमी 1994 में सैन डिएगो पहुंचा था। उसने उस समय दावा किया था कि वह अंग्रेजी भाषा सीखने के लिए अमेरिका आया है। हालांकि, बाद की जांच में यह सामने आया कि उसने पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और धार्मिक गतिविधियों में उसकी भागीदारी बढ़ती गई। 9/11 हमलों के बाद एफबीआई की शुरुआती जांच में उसका नाम संदिग्धों में शामिल हुआ। उसका नाम एक अपार्टमेंट किराये के दस्तावेज में मिला था, जिस पर नवाफ अल-हाजमी और खालिद अल-मिहधर के हस्ताक्षर थे। दोनों बाद में 9/11 हमलों को अंजाम देने वाले अपहरणकर्ताओं में शामिल पाए गए थे।

ब्रिटेन में गिरफ्तारी के दौरान मिले थे हजारों दस्तावेज

21 सितंबर 2001 को ब्रिटिश पुलिस ने बायूमी को बर्मिंघम में गिरफ्तार किया था। उसके पास से बड़ी संख्या में दस्तावेज, तस्वीरें और करीब 80 वीडियो टेप बरामद किए गए थे। बरामद सामग्री में एक हाथ से बनाया गया ऐसा स्केच भी शामिल था, जिसमें एक विमान का चित्र बना था और उसके साथ ऊंचाई व दूरी से जुड़े गणितीय हिसाब लिखे थे। एफबीआई को इस दस्तावेज की जानकारी हमलों के कुछ ही दिनों बाद मिल गई थी। बाद में एक संघीय जज ने कहा था कि पहली नजर में यह दस्तावेज बायूमी को 9/11 हमलों की जानकारी से जोड़ने वाला प्रतीत होता है।

एफबीआई की भूमिका पर भी उठे सवाल

मीडिया एजेंसी की जांच में दावा किया गया कि सैन डिएगो स्थित एफबीआई अधिकारियों ने बायूमी से जुड़े सबूत जुटाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सीमित जानकारी ही मिल सकी। रिपोर्ट के अनुसार, एफबीआई के अलग-अलग विभागों ने बायूमी के सऊदी सरकार से जुड़े संपर्कों की जांच करने की कोशिश की थी, लेकिन इन प्रयासों को आगे नहीं बढ़ाया गया।

28 सितंबर 2001 को रिहा हुआ था बायूमी

अमेरिकी अधिकारियों ने बाद में कहा कि बायूमी को अमेरिका लाने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद उसे 28 सितंबर 2001 को रिहा कर दिया गया।  बायूमी और सऊदी सरकार दोनों ने 9/11 हमलों में किसी भी तरह की भूमिका या पहले से जानकारी होने के आरोपों को खारिज किया है। मीडिया एजेंसी ने इस मामले पर बायूमी और सऊदी सरकार से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एफबीआई ने भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।