लखनऊ: यूपी की सियासत में मायावती एक ऐसा नाम रहा है, जिनके समय में अपराध अपने चरम पर था। पार्टी में मुख्तार अंसारी जैसे बाहुबली चेहरे हो। मायावती की पार्टी का दाम हमेशा दागदार रहा है। गुंडावाद की राजनीति के तौर पर भी मायावती की बसपा काफी ज्यादा सुर्खियों में रही। ऐसे में अब अपनी साख को साफ करने के लिए मायावती का फोकस 2027 विधानसभा चुनाव पर है। चुनाव से पहले BSP सुप्रीमो मायावती ने बड़ी बैठक आयोजित की है। इसमें चुनावी तैयारियों को लेकर मंथन किया।

मायावती की अध्यक्षता में लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित BSP प्रदेश मुख्यालय पर अहम बैठक हुई। बैठक में यूपी के सभी 75 जिलों के जिला अध्यक्षों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा भी मौजूद हैं। बैठक में संगठन की जमीनी मजबूती, चुनावी तैयारियों, बेहतर उम्मीदवारों के चयन और सर्वसमाज में पार्टी का जनाधार बढ़ाने को लेकर चर्चा हो रही है। मायावती पिछले दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा कर आगे के लिए जरूरी निर्देश भी देंगी।

चुनावी रणनीति पर होगा मंथन

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने 5 नवंबर को लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक बुलाई है। इसमें प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। बैठक में संगठन की जमीनी स्थिति, चुनावी तैयारियों और पार्टी का जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर मंथन किया। मायावती संभावित प्रत्याशियों के चयन और संगठन को मजबूत बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश भी दे सकती हैं। इस बैठक का मुख्य उपद्देश्य पार्टी द्वारा आगामी चुनावों को लेकर खास रणनीति तैयार करना था।

प्रोगेस रिपोर्ट के आधार पर होगी खास तैयारियां

लखनऊ में 6 दिसंबर को बसपा की बड़ी रैली आयोजित होने की संभावना है। फिलहाल इसे लेकर अभी कोई औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे 2027 चुनाव से पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और संगठन की ताकत दिखाने की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं। मायावती ने पार्टी के उम्मीदवारों को उनकी प्रोगेस रिपोर्ट के आधार पर खास तैयारियां करने निर्देश देते हुए नई गाइडलाइंस जारी की है। मीटिंग 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले हो रही है, जिसमें BSP अपने ऑर्गेनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर को मज़बूत करने और चुनावी मुकाबले की तैयारी पर ध्यान दे रही है।


मायावती के सामन बड़ी चुनौतियां?

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में बसपा केवल एक सीट जीत सकी थी। BSP जो 2007-12 तक उत्तर प्रदेश में सत्ता में रही।13 परसेंट से ज़्यादा वोट शेयर के बावजूद 2022 के विधानसभा चुनावों में सिर्फ़ एक सीट पर सिमट गई। वहीं साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में पार्टी का सुपड़ा एकदम साफ हो चुका था। चुनावों में पार्टी एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई।

अब देखना यह होगा कि क्या मायावती अपनी चुनावी रणनीति के जरिए विपक्ष को करारी शिख्सत दे पाती हैं, या फिर मीटिंग महज कुछ उम्मीदवारों के साथ एक मुलाकात ही बनकर रह जाएगी। ऐसे में मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने जनाधार को वापस हासिल करने और संगठन को दोबारा सक्रिय करने की है। बसपा ने 2027 का चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ने का ऐलान किया है।

क्या बोले सपा एमपी धर्मेंद्र यादव?

बात करें वर्तमान समय की तो राज्य में समाजवादी पार्टी चुनावों से ठीक पहले BJP पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगा रही है। समाजवादी पार्टी के MP धर्मेंद्र यादव ने BJP पर SIR एक्सरसाइज के ज़रिए वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के वोट डिलीट किए जा रहे हैं और नकली वोट जोड़े जा रहे हैं।

BJP अपने काम छिपाने का प्रयास कर रही है। लेकिन लोग जानते हैं कि SIR का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने के लिए किया गया है। जिसमें विपक्ष के वोट काटकर और नकली वोट जोड़े गए हैं। अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को सबूत दिए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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